पितृ पक्ष की अष्टमी के दिन माँ लक्ष्मी के गज-स्वरूप की पूजा का विधान है. कुछ स्थानों पर इसे गज अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. महालक्ष्मी का व्रत राधा-अष्टमी के दिन से शुरु होकर 16वें दिन आश्विन मास की अष्टमी को समापन किया जाता है. इस दिन विधि-विधान से लक्ष्मीजी एवं उनकी सवारी की पूजा की जाती है.
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