हिंदू पौराणिक ग्रंथों में भगवान श्रीराम को 'मर्यादा पुरुषोत्तम' कहा जाता है. यानी पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ पुरुष. विद्वानों का भी मानना है कि अगर आप जीवन में महान बनना चाहते हैं तो श्रीराम द्वारा दी गई नैतिक शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करें. त्रेता युग में भगवान विष्णु का अवतार होने के बावजूद श्रीराम ने कहीं भी ईश्वरत्व का प्रदर्शन नहीं किया.
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