त्योहार

⚡पितृपक्ष के दिन ये गलतियां कर पितरों को ना करें नाराज!

By Rajesh Srivastav

सनातन धर्म में माता-पिता की सेवा परमधर्म माना जाता है. इसलिए शास्त्रों में दिवंगत हो चुके पितरों का उद्धार करना पुत्र का अहम कर्तव्य माना गया हैं. अपने ही जन्मदाता माता-पिता को मृत्योपरांत पुत्र भुला ना दें, इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है. श्राद्ध पखवारा यानी पितृपक्ष प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन में अमावस्या के दिन समाप्त होता है.

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