परंपरागत रुप से लोग गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश को आमंत्रित करते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि कैलास पर्वत से आने के बाद भगवान गणेश पृथ्वी पर अपने भक्तों से मिलने आते हैं और उनकी समस्त कामनाओं की पूर्ति करते हैं. इसके बाद लोग डेढ़, तीन, पांच, सात और ग्यारहवें यानी अनंत चतुर्दशी के दिन बाप्पा का विसर्जन करते हैं.
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