स्वप्न देखना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा, जिसने कभी सपने नहीं देखें होंगे. फर्क यही है कि कोई अकसर सपने देखता है तो किसी को कभी-कभी सपने आते हैं. कोई सपनों को तवज्जो नहीं देता तो कोई सपने देखकर परेशान हो जाता है कि आखिर उसे इतने सपने क्यों आते हैं?
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