पिंकी करमाकर ने साल 2012 के लंदन ओलंपिक में एक मशालची (torchbearer ) के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, तब वह 10वीं कक्षा में थी और राष्ट्रीय तीरंदाज बनने का सपना देखा था. लंदन ओलंपिक से लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया गया. हालांकि, विडंबना यह है कि अब वह असम के एक चाय बागान में दिहाड़ी मजदूर के रूप में 167 रुपये प्रतिदिन पर काम करती हैं.
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