उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति को अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के बाद भी 8 महीने जेल में गुजारने पड़े. इसके पीछे वजह है अदालत द्वारा दिए गए आदेश में हुई एक छोटी सी गलती. दरअसल, जमानत के आदेश में उनके मध्य नाम 'कुमार' का उल्लेख नहीं किया गया था. रिमांड शीट में आवेदक का नाम विनोद कुमार बरुआर था, जबकि अदालत के आदेश ने उसका नाम विनोद बरुआर बताया.
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