2018 में इस परियोजना को ₹11,332 करोड़ की लागत से स्वीकृति मिली थी, लेकिन अब यह लागत बढ़कर ₹18,120 करोड़ हो गई है. इस वृद्धि का कारण जुहू से मलाड में कास्टिंग यार्ड का स्थानांतरण, साथ ही सौंदर्यीकरण और प्रकाश व्यवस्था जैसी अतिरिक्त सुविधाएं बताई जा रही हैं.
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