बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 जनवरी को POCSO एक्ट के तहत एक अपीलकर्ता को बरी कर दिया और नाबालिग के अपराध के तहत दोषी ठहराते हुए कहा, "जाहिर है यह अभियोजन का मामला नहीं है कि अपीलकर्ता ने पीड़िता को निर्वस्त्र किए बिना उसके स्तन दबाए. कोई प्रत्यक्ष शारीरिक संपर्क नहीं है,
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