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⚡शहनाई के जादूगर: शिव और शिवनगरी के प्रेमी थे ‘उस्ताद’, 'मेरी गंगा कहां से लाओगे' कह ठुकरा दिया था अमेरिका का प्रस्ताव

By IANS

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जब शहनाई बजाते थे तो मानो गंगा की धारा बह उठती थी. छोटे से वाद्ययंत्र के छिद्रों पर उनकी जादुई पकड़ ने शहनाई को भारत की आत्मा और बनारस की पहचान बना दिया और उन्हें 'भारत रत्न' की उपाधि दिलाई. उस्ताद के लिए सबसे बड़ा सम्मान गंगा के घाट और बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी थी.

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