भवन विभाग ने इन क्षेत्रों में से कुछ को "रेड जोन" घोषित किया है. अधिकारियों का कहना है कि रेड जोन वे इलाके हैं जहां अवैध निर्माणों की संख्या बेहद अधिक है. जांच के दौरान निगम अधिकारियों को पता चला कि इन अवैध निर्माणों के पीछे स्थानीय प्रमोटरों और सिंडिकेटों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है. सूत्रों के मुताबिक, कई मामलों में प्रमोटर या निर्माण कंपनियां नगर निगम से "जी प्लस फोर" इमारत बनाने की अनुमति लेती हैं, लेकिन बाद में नियमों का उल्लंघन कर "जी प्लस फाइव" या उससे अधिक मंजिलों का निर्माण कर देती हैं.
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