1922 में महात्मा गांधी ने जब चौरी-चौरा काण्ड के बाद अंग्रेजों के खिलाफ छेड़े ‘असहयोग आंदोलन’ को अचानक वापस ले लिया तो देश भर के क्रांतिकारियों को धक्का लगा था. उन्होंने शपथ ली कि क्रांति हथियारों के दम पर होगी और शहादत देकर भी देश को आजादी दिलायेंगे.
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