गांव कस्बों में रहने वाले मध्यम वर्ग के छात्रों को, दलित, पिछड़े, आदिवासी भाई बहनों को सबसे ज्यादा भाषाई विभाजन का सामना करना पड़ता है. मातृभाषा में पढ़ाई से गरीब बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा. उनकी प्रतिभा के साथ न्याय होगा. प्रारंभिक शिक्षा में भी मातृभाषा को प्रोत्साहित करने का काम प्रारंभ हो चुका है.
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