बेटे की लगातार पीड़ा को देखते हुए हरीश के माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की थी, लेकिन 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी.
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