सिद्धारमैया के ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद शिवकुमार समर्थक दिल्ली पहुंचे और खुलकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग की. इसके जवाब में सिद्धारमैया खेमे ने फिर दलित मुख्यमंत्री का प्रस्ताव आगे बढ़ाया. पहले सिद्धारमैया ने पांच साल का कार्यकाल पूरा करने की बात कही, लेकिन बाद में कहा कि वे पार्टी हाईकमान के फैसले का पालन करेंगे.
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