पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पितृपक्ष में पिंडदान और श्राद्ध करने की परंपरा काफी पुरानी है. देश के कई स्थानों में पितरों को श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध से पुरखों को मोक्ष प्रदान किया जाता है लेकिन इसमें सर्वोत्तम स्थान गया को माना जाता है. यही कारण है कि गया को 'मोक्षस्थली' भी कहा जाता है.
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