पश्चिमी महाराष्ट्र के सतारा में स्थित सैनिक स्कूल से शिक्षा लेने के बाद भल्ला राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 32वें पाठ्यक्रम में शामिल हुए और 1968 में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू पायलट बने. वह तेजपुर स्थित 28वें स्क्वाड्रन का हिस्सा रहे. उनके पूर्व सहकर्मी ने बताया कि 1971 के युद्ध में भल्ला ने कई उड़ानें भरीं और ढाका स्थित गवर्नर हाउस सहित कई अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों की रक्षा की, जिसने अंतत: पाकिस्तान के आत्मसमर्पण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
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