बाद में उपराज्यपाल ने कहा कि तमिल लेखकों ने मांग की है कि राजनारायणन जिस मकान में रहते थे, उसे स्मृति पुस्तकालय में बदला जाए. उपराज्यपाल ने कहा, ‘‘इस अनुरोध पर विचार किया जाएगा.’’ राजनारायणन 1980 के दशक से पांडिचेरी विश्वविद्यालय में लोक-साहित्य विभाग के प्रोफेसर थे. उन्हें 1991 में अपने उपन्यास ‘गोपालापुरातु मक्कल’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था.
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