इस घटनाक्रम से एक नयी चिंता उभर कर सामने आयी है कि क्या मौजूदा सरकार स्वतंत्र रूप से भविष्य में काम कर पायेगी और अगले साल फरवरी में माली में तय लोकतांत्रिक चुनाव को आयोजित कराने की योजना को आगे बढ़ा पायेगी. संयुक्त राष्ट्र माली में शांति अभियानों पर हर साल 1.2 अरब डॉलर खर्च करता है.
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