आरबीआई ने एक वक्तव्य में बताया कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के कुछ प्रावधानों और 'आरक्षित निधियों के हस्तांतरण' से संबंधित निर्देशों का उल्लंघन करने पर यह जुर्माना लगाया गया है. केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसने 31 मार्च, 2020 तक बैंक की वित्तीय स्थिति को लेकर पर्यवेक्षी मूल्यांकन सांविधिक जांच (आईएसई) जांच की थी.
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