उनके मुताबिक, ‘‘मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही 2014 में अध्यादेश के माध्यम से किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश की. साल 2015 में उच्चतम न्यायालय में शपथपत्र दे दिया कि किसानों को लागत के अलावा 50 प्रतिशत मुनाफा कभी भी समर्थन मूल्य के तौर पर नहीं दिया जा सकता.
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