महामारी के दौरान, लोगों के व्यवहार के बारे में बहुत सारी धारणाएं बनाई गईं. उनमें से कई धारणाएँ गलत थीं, जो विनाशकारी नीतियों की ओर ले जाती थीं. कई सरकारों को चिंता थी कि उनके महामारी प्रतिबंधों से लोगों को ‘‘व्यवहारगत थकान’’ होने लगेगी, जिससे लोग प्रतिबंधों का पालन करना बंद कर देंगे.
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