भारत में कोविड-19 के मामलों पर किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया कि 19 वर्ष तक की आयु के लोगों तथा महिलाओं के बीच संक्रमण के मामलों में वृद्धि हुई और कोरोना वायरस के कम संक्रामक स्वरूप (नॉन वेरिएंट ऑफ कंसर्न) की तुलना में डेल्टा स्वरूप ने टीके की खुराक लेने के बाद लोगों को अपनी चपेट में अधिक लिया और इस स्वरूप के कारण मरने वाले लोगों की दर भी अधिक रही.
...