‘‘दो गोल से पिछड़ने के बाद भी हमने हार नहीं मानी थी और एक दूसरे से यही कह रहे थे कि यही हमारे पास कुछ कर गुजरने का आखिरी मौका है, बाद में पूरी जिंदगी पछताना नहीं है. ’’यह कहना है तोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर 41 साल बाद इतिहास रचने वाली भारतीय हॉकी टीम के उपकप्तान हरमनप्रीत सिंह का.
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