दिल्ली वन विभाग ने डीडीए को अवगत कराया है कि यमुना के बाढ़ संभावित मैदानी हिस्सों में करीब नौ हज़ार हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल नदी की पारिस्थितिकी के अनुकूल वृक्षारोपण और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के लिए अनिवार्य वनरोपण के वास्ते किया जा सकता है.
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