World Heart Day 2019: स्वस्थ जीवन के लिए ऐसे रखें ह्रदय का खास ख्याल क्योंकी ये दिल का मामला है
ह्रदय रोग पर हुए हालिया शोध के पश्चात आंकडे बताते हैं कि संपूर्ण विश्व में हर पांचवा व्यक्ति ह्रदय संबंधी छोटी-बड़ी बीमारियों से ग्रस्त है, और इसकी मुख्य वजह है, अव्यवस्थित जीवन शैली और असंतुलित खानपान. एक बार हृदय रोड के चंगुल में फंसने के बाद मरीज को जीवनपर्यंत दवा और चिकित्सकों पर निर्भर रहना पड़ता है.
World Heart Day 2019: ह्रदय रोग (Heart Disease) पर हुए हालिया शोध के पश्चात आंकडे बताते हैं कि संपूर्ण विश्व में हर पांचवा व्यक्ति ह्रदय संबंधी छोटी-बड़ी बीमारियों से ग्रस्त है, और इसकी मुख्य वजह है, अव्यवस्थित जीवन शैली और असंतुलित खानपान. एक बार हृदय रोड के चंगुल में फंसने के बाद मरीज को जीवनपर्यंत दवा और चिकित्सकों पर निर्भर रहना पड़ता है. इसीलिए ह्रदय रोग के प्रति जागरुकता पैदा करने और ह्रदय संबंधी विकारों से बचने के लिए संपूर्ण विश्व में 29 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ह्रदय दिवस मनाया जाता है.
क्या है ह्रदय की सरंचना एवं कार्य
ह्रदय वास्तव मे कोशिका, शिराओं और धमनिय़ों का नेटवर्क होता है. यहां से ही रक्त वाहिकाएं हमारे शरीर के सभी भीतरी अंगों में रक्त लेकर जाती है. यह शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है.
ह्रदय में किसी भी प्रकार के विकार उत्पन्न होने से इसका सबसे ज्यादा असर फेफड़े, मस्तिष्क, किडनी और शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता. इन अंगों पर या तो रक्त का प्रवाह रुक जाता है अथवा मद्धिम पड़ जाता है और ये स्थिति मरीज के लिए घातक साबित हो सकती है.
दिल्ली के चिकित्सक डा. जितेंद्र सिंह के अनुसार दिल की बीमारी कभी भी और किसी को भी हो सकती है. इसके लिए कोई उम्र तय नहीं होती, एक समय था, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी का औसत कम होता था, मगर बदले हुए परिवेश में महिलाओं में भी यह बीमारी काफी सामान्य बन चुकी है. इसके पीछे मुख्य वजहें हैं, महिलाओं का घर के बाहर निकलकर करियर में भी इन्वाल्व होना, जिसकी वजह से खानपान में लापरवाही, प्रदूषण, दोहरी भूमिका से उत्पन्न स्ट्रेस इत्यादि. विश्व ह्रदय दिवस लोगों को इसी भावना की ओर प्रेरित करता है, कि लोग कोशिश करें तो आजीवन ह्रदय रोग से सुरक्षित रह सकते हैं.
इतिहास
आम लोगों को दिल के प्रति जागरुक रखने के उद्देश्य से साल 2000 से 'विश्व ह्रदय दिवस' मनाने की शुरूआत हुई. तब सितंबर के अंतिम रविवार के दिन यह दिवस मनाया जाता था. लेकिन 2014 से इसके लिए एक तय तिथि 29 सितंबर निर्धारित कर दी गई. इस दिवस को और ज्यादा रोचक और आकर्षक बनाने के लिए 2009 से इसे एक नयी थीम के साथ मनाया जाने लगा. उस वर्ष थीम रखा गया था, 'आफिस में ह्रदय स्वास्थ्य'. इसके बाद से अलग अलग थीम रखे गये.
शुरू से रहें सजग
एक समय था, जब 35 से 40 की आयु से ह्रदय रोग के लक्षण नजर आते थे, लेकिन आज दस साल का बच्चा भी इस रोग से ग्रस्त देखा जाता है. ऐसी स्थिति को देखते हुए बेहतर होगा कि आप स्वयं और अपने बच्चों के सेहत की जांच करते रहें. ह्रदय संबंधी सामान्य समस्याओं को भी हलके से ना लें. खानपान की क्वालिटी और क्वांटिटी के साथ समय का भी विशेष ध्यार रखें. ह्रदय रोग विशेषग्यों का सुझाव है कि हाई ब्लड प्रेशर पर सही नियंत्रण नहीं रखने अथवा क्रोध और तनाव ज्यादा करने वालों को हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है.
कैसे रखें अंकुश
* ध्यान रहे, सामान्य स्थिति में आपका ह्रदय एक मिनट मे 72 बार और 24 घंटे में 100800 बार धड़कता है. आपका ह्रदय एक दिन में दो हजार गैलन रक्त की पंपिंग करता है. अगर सीने के बाईं ओर अथवा बीच में किसी भी तरह का प्रेशर या दर्द महसूस हो या चेहरे पर जरूरत से ज्यादा पसीना आ रहा है तो तत्काल किसी हार्ट स्पेशिलिस्ट से संपर्क करे.
* ज्यादा मिर्च-मसाला, तेलयुक्त खाद्य पदार्थ, फैट, चिकनाई युक्त भोजन, मधुमेह इत्यादि से परहेज करें.
* प्रातकाल किसी बगीचे में कम से कम 15 से 20 मिनट टहलें अथवा चिकित्सक से सलाह लेकर हलका-फुल्का व्यायाम करें.
* दफ्तर के व्यस्त शेड्यूल से वक्त निकाल कर फैमिली के साथ कहीं पर्यटन के लिए जाएं.
* फास्ट फूड, पिज्जा, बर्गर आदि से दूरी बनाकर रहें.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 28, 2019 10:19 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

