UNICEF Day 2023: क्या है यूनिसेफ और क्यों जरूरी है यूनिसेफ दिवस सेलिब्रेशन? जानें भारत में बच्चों के संवैधानिक अधिकार?
हर वर्ष 11 दिसंबर को दुनिया भर में यूनिसेफ दिवस मनाया जाता है. यूनिसेफ का आशय संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन फंड से बच्चों के अधिकारों, उनकी रक्षा एवं जरूरतों की पूर्ति में मदद करना है, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करके उनके जीवन को संरक्षित करने के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके. आज यूनिसेफ दुनिया भर के लगभग 200 से अधिक देशों में बच्चों एवं किशोरों को हिंसा और शोषण से सुरक्षित रखने का कार्य करता है.
हर वर्ष 11 दिसंबर को दुनिया भर में यूनिसेफ दिवस मनाया जाता है. यूनिसेफ का आशय संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन फंड से बच्चों के अधिकारों, उनकी रक्षा एवं जरूरतों की पूर्ति में मदद करना है, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करके उनके जीवन को संरक्षित करने के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके. आज यूनिसेफ दुनिया भर के लगभग 200 से अधिक देशों में बच्चों एवं किशोरों को हिंसा और शोषण से सुरक्षित रखने का कार्य करता है. उनके अधिकारों एवं जरूरतों की पूर्ति करता है. आइये जानते हैं इस दिवस विशेष के इतिहास, महत्व एवं भारत में बच्चों के अधिकारों की बात करते हैं.
यूनिसेफ दिवस का महत्व
यूनिसेफ दिवस बच्चों के सतत विकास के संदर्भ में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कोविड 19 के संक्रमण काल में यूनिसेफ की भूमिका जग जाहिर हुई, जब वैक्सीन प्रोवाइड करने के मामले में यूनिसेफ दुनिया में सबसे आगे था. यूनिसेफ दिवस का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के बच्चों की रक्षा करना और शिक्षा, भोजन, वैक्सीनेशन, खानपान, स्वच्छता, कौशल निर्माण, एचआईवी की रोकथाम तथा माताओं एवं शिशुओं के उपचार को लेकर आवश्यक कदम उठाना है.
यूनिसेफ का इतिहास
यूनिसेफ का शाब्दिक अर्थ, यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रन इमरजेंसी फंड (UNICEF) है. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात देश भर के बच्चों की सहायता को बढावा देने के लिए इस दिन की स्थापना की गई थी. विशेषकर यूरोप एवं चीन के बच्चों की, जिन्हें मदद की विशेष जरूरत थी, 1953 में यूनिसेफ संयुक्त राष्ट्र की एक स्थायी एजेंसी बन गई. 11 दिसंबर 1946 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (यूनिसेफ) के लिए इस दिवस विशेष को शुरू करने की घोषणा की. उन दिनों हर विकासशील देशों में बच्चों और महिलाओं की जरूरतों से निपटने हेतु यूनिसेफ के जनादेश को 1950 में बनाया गया था. 1953 में. यह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का हिस्सा बन गया.
भारत में बच्चों के संवैधानिक अधिकार
* समानता का अधिकार- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार, भारत में प्रत्येक नागरिक कानून के समक्ष समान है और उसे कानून के तहत समान सुरक्षा दी जाती है. चूंकि बच्चे भविष्य के कर्णधार हैं, इसलिए यह अधिकार उन पर लागू होता है।
* भेदभाव के विरुद्ध अधिकार- अनुच्छेद 15(3) के अनुसार, राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए कोई विशिष्ट उपाय अपनाने से नहीं रोका जाना चाहिए.
* जीवन का अधिकार- अनुच्छेद 21 के अनुसार हर व्यक्ति को जीवन, स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार है. इसके तहत भारत में प्रत्येक बच्चे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और उचित प्रक्रिया का हकदार है.
स्वास्थ्य का अधिकार- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार है, भले ही भौतिक रूप से ही सही. इसमें एचआईवी संक्रमण, पीने के लिए स्वच्छ जल का अभाव, उचित स्वच्छता और भुखमरी जैसे मुद्दे शामिल हैं.
शिक्षा का अधिकार- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 ए के तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का अधिकार है. अनुच्छेद 45 के अनुसार, राज्य को छह वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए.
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 10, 2023 09:02 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

