Sawan 2025: भगवान शिव को क्यों चढ़ाया जाता है बेलपत्र और धतूरा? जानें सावन में इन खास चीजों के पीछे का वैज्ञानिक और पौराणिक रहस्य

भगवान शिव को बेलपत्र इसलिए चढ़ाया जाता है क्योंकि यह त्रिदेव का प्रतीक है और इसकी तासीर ठंडी होती है. समुद्र मंथन के विष की गर्मी को शांत करने के लिए धतूरा अर्पित किया गया था, जो त्याग और औषधीय गुणों का भी प्रतीक है. सावन में ये चीजें चढ़ाना पौराणिक कथाओं के साथ-साथ वैज्ञानिक स्वास्थ्य लाभों से भी जुड़ा है.

Sawan 2025: सावन का महीना आते ही चारों तरफ "हर हर महादेव" की गूंज सुनाई देने लगती है. शिव भक्त अपने भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं, व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर कई चीजें अर्पित करते हैं. इन सबमें दो चीजें सबसे खास होती हैं - बेलपत्र और धतूरा.

कभी आपने सोचा है कि आखिर भगवान शिव को ये कांटेदार फल और साधारण सी पत्तियां क्यों चढ़ाई जाती हैं? इसके पीछे सिर्फ श्रद्धा नहीं, बल्कि गहरे पौराणिक और वैज्ञानिक राज छिपे हैं. चलिए, आज इसी रहस्य को आसान भाषा में समझते हैं.

बेलपत्र: महादेव की सबसे प्रिय पत्तियां

सबसे पहले बात करते हैं बेलपत्र की, जिसे बिल्व पत्र भी कहते हैं. शिव पूजा इसके बिना अधूरी मानी जाती है.

1. पौराणिक कहानी क्या है?

2. इसके पीछे का विज्ञान क्या है?

आयुर्वेद में बेलपत्र को एक चमत्कारी औषधि माना गया है.

तो जब हम शिव को बेलपत्र चढ़ाते हैं, तो हम प्रतीकात्मक रूप से उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे हमारे तन और मन को शांत और स्वस्थ रखें.

धतूरा: विष को अमृत बनाने का प्रतीक

अब बात करते हैं धतूरे की, जो एक जहरीला फल माना जाता है. फिर इसे भगवान को क्यों चढ़ाते हैं?

1. पौराणिक कहानी क्या है?

इसकी कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी है.

2. इसके पीछे का विज्ञान क्या है?

धतूरा भले ही जहरीला हो, लेकिन आयुर्वेद में इसे एक शक्तिशाली औषधि माना गया है. (ध्यान दें: इसका इस्तेमाल सिर्फ विशेषज्ञ की देखरेख में और शुद्ध करके ही किया जाता है, इसे सीधे खाना जानलेवा हो सकता है).

तो अगली बार जब आप सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं, तो याद रखिएगा कि यह सिर्फ एक परंपरा नहीं है. यह हमारे पूर्वजों के गहरे ज्ञान का प्रतीक है, जो धर्म को विज्ञान और सेहत से जोड़ता था. ये चीजें हमें सिखाती हैं कि प्रकृति में मौजूद हर चीज, चाहे वो साधारण पत्ती हो या जहरीला फल, उसका अपना एक महत्व है.

यह शिव की पूजा का सार भी है - जो संसार के विष को पीकर भी कल्याण करते हैं, वही महादेव हैं.

हर हर महादेव!

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