List of 51 Shaktipeeths: जहां गिरे माता सती के अंग, वहीं बने 51 शक्तिपीठ; देखें भारत और विदेशों में पवित्र स्थल की पूरी लिस्ट
माता सती के 51 शक्तिपीठों का हिंदू धर्म (Hindu Dharm) में अत्यधिक महत्व है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, सती ने भगवान शिव (Lord Shiv) से विवाह किया था, लेकिन उनके पिता दक्ष प्रजापति इससे नाखुश थे.
List of 51 Shaktipeeths: माता सती के 51 शक्तिपीठों का हिंदू धर्म (Hindu Dharm) में अत्यधिक महत्व है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, सती ने भगवान शिव (Lord Shiv) से विवाह किया था, लेकिन उनके पिता दक्ष प्रजापति इससे नाखुश थे. दक्ष ने कनखल (वर्तमान हरिद्वार) में एक यज्ञ के दौरान शिव का खूब अपमान किया. इससे सती को गहरा आघात पहुंचा और उन्होंने यज्ञ की अग्नि में आत्मदाह कर लिया. इस घटना से भगवान शिव क्रोधित हो गए और शव को उठाकर तांडव करने लगे. फिर प्रलय की आशंका को देखते हुए भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को कई टुकड़े कर दिए.
कहा जाता है कि जहां-जहां सती के शरीर के अंग गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ (51 Shaktipeeths Stories) स्थापित हो गए.
भारत (38 शक्तिपीठ)
1. महामाया – अमरनाथ, जम्मू-कश्मीर
2. ज्वाला/सिद्धिदा – ज्वालामुखी, हिमाचल प्रदेश
3. कामाख्या – गुवाहाटी, असम
4. त्रिपुरसुंदरी – उदयपुर, त्रिपुरा
5. अवंति – उज्जैन, मध्य प्रदेश
6. कालमाधव – अमरकंटक, मध्य प्रदेश
7. नर्मदा/शोन्देश – अमरकंटक, मध्य प्रदेश
8. शिवानी/मैहर – सतना, मध्य प्रदेश
9. त्रिपुरमालिनी – जालंधर, पंजाब
10. सावित्री/भद्रकाली – कुरुक्षेत्र, हरियाणा
11. विशालाक्षी – वाराणसी, उत्तर प्रदेश
12. वाराही – पंचसागर, उत्तर प्रदेश
13. ललिता – प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
14. उमा – वृंदावन, उत्तर प्रदेश
15. जय दुर्गा – देवघर, झारखंड
16. दंतेश्वरी – दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़
17. गायत्री – पुष्कर, राजस्थान
18. अंबिका – भरतपुर, राजस्थान
19. अंबाजी – अंबाजी, गुजरात
20. चंद्रभागा – सोमनाथ, गुजरात
21. भ्रामरी – जनस्थान, नासिक, महाराष्ट्र
22. त्रिस्रोत भ्रामरी – जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल
23. बहुला – बर्धमान, पश्चिम बंगाल
24. महिषमर्दिनी – बक्रेश्वर, पश्चिम बंगाल
25. फुल्लरा – अट्टहास, बीरभूम, पश्चिम बंगाल
26. कालीघाट – कोलकाता, पश्चिम बंगाल
27. कुमारी शक्ति – आनंदमयी मंदिर, पश्चिम बंगाल
28. नंदिनी – नंदिकेश्वरी, बीरभूम, पश्चिम बंगाल
29. मंगलचंडी – उज्जनि, पश्चिम बंगाल
30. किरीतेश्वरी – मुर्शीदाबाद, पश्चिम बंगाल
31. कपालिनी – विभाष, मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल
32. देवगर्भ – बीरभूम, पश्चिम बंगाल
33. चामुंडेश्वरी – मैसूर, कर्नाटक
34. श्रीसुंदरी/भ्रामरांबा – श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश
35. महालक्ष्मी – श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश
36. राकिनी/सर्वशैल – आंध्र प्रदेश (राजमहेंद्री, गोदावरी नदी)
37. श्रावणी – कन्याकुमारी, तमिलनाडु
38. नारायणी – शुचिंद्रम, तमिलनाडु
नेपाल (3 शक्तिपीठ)
39. गंडकी चंडी – मुक्तिनाथ, पोखरा
40. महाशिरा – गुह्येश्वरी, काठमांडू (पशुपतिनाथ के पास)
41. दाक्षायनी – मानसरोवर क्षेत्र, कैलाश (कुछ मान्यताओं में नेपाल-तिब्बत सीमा)
बांग्लादेश (4 शक्तिपीठ)
42. भवानी – चंद्रनाथ हिल्स, चटगांव
43. अर्पण – भवानीपुर
44. सुगंधा – शिकारपुर, बरिसाल
45. यशोरेश्वरी – खुलना जिला
पाकिस्तान (2 शक्तिपीठ)
46. हिंगलाज माता – बलूचिस्तान
47. महिषमर्दिनी – कराची
श्रीलंका (1 शक्तिपीठ)
48. नागापूशनी अम्मन – नैनातिवु, जाफना
तिब्बत/चीन (1 शक्तिपीठ)
49. दाक्षायनी – मानसरोवर क्षेत्र (तिब्बत)
अतिरिक्त मान्यता वाले (2 शक्तिपीठ और गिने जाते हैं)
50. विमला – पुरी, ओडिशा (जगन्नाथ मंदिर परिसर)
51. बिरजा – जाजपुर, ओडिशा
भक्ति और आस्था के केंद्र हैं शक्तिपीठ
ये स्थल न केवल धार्मिक धरोहर हैं, बल्कि शक्ति, भक्ति और आस्था के केंद्र भी हैं. भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, तिब्बत और श्रीलंका में फैले ये शक्तिपीठ हिंदू आस्था के सूत्र हैं.
भक्तों का मानना है कि इन स्थलों पर दर्शन और पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यही कारण है कि नवरात्रि, दुर्गा पूजा और अन्य विशेष त्योहारों के दौरान इन पीठों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है. Latestly.com इसकी पुष्टि नहीं करता है.