Shab e Barat 2026 Namaz Time: भारत में कब है 'माफी की रात'? जानें नमाज का वक्त, फजीलत और इबादत का सही तरीका

शब-ए-बरात 2026 भारत में 3 फरवरी की शाम से शुरू हो रही है. इस पाक रात में मुस्लिम समुदाय के लोग पूरी रात जागकर नमाज, तिलावत और दुआओं में मशगूल रहते हैं. इस लेख में नमाज के समय और इस रात की अहमियत की पूरी जानकारी दी गई है.

शब-ए-बारात मुबारक

Shab e Barat 2026 Namaz Time: इस्लामी कैलेंडर के आठवें महीने 'शाबान' की 15वीं रात यानी 'शब-ए-बरात' (Shab-e-Barat) पूरे भारत में आज, मंगलवार 3 फरवरी 2026 की शाम (मग़रिब की नमाज के बाद) से मनाई जा रही है. इसे 'तौबा' और 'मगफिरत' (माफी) की रात कहा जाता है. मुस्लिम समुदाय के लोग इस मुकद्दस रात में अल्लाह की बारगाह में अपनी खताओं की माफी माँगते हैं और आने वाले साल के लिए खैर-ओ-बरकत की दुआ करते हैं. भारत के विभिन्न शहरों में चांद के हिसाब से यह रात 3 फरवरी की शाम से शुरू होकर 4 फरवरी की सुबह (फज्र) तक जारी रहेगी.

 शब ए बरात इबादत और नमाज का वक्त

शब-ए-बरात में नमाज का कोई एक निश्चित समय नहीं होता, बल्कि यह पूरी रात इबादत के लिए मुकर्रर है. हालांकि, रवायतों के अनुसार इबादत का सिलसिला इस प्रकार रहता है:

प्रारंभ (मग़रिब): 3 फरवरी की शाम सूर्यास्त (लगभग 6:00 PM - 6:30 PM शहर के अनुसार) के बाद से ही इस रात की शुरुआत हो जाती है.

नफिल नमाज: ईशा की नमाज के बाद (लगभग 8:00 PM के बाद) लोग मस्जिदों और घरों में नफिल नमाजें पढ़ना शुरू करते हैं.

तहाज्जुद का वक्त: रात का आखिरी पहर (पहेले तड़के 3:00 AM से फज्र तक) दुआओं की कुबूलियत के लिए सबसे अफजल माना जाता है.

समापन (फज्र): 4 फरवरी की सुबह सादिक (तड़के लगभग 5:30 AM - 5:50 AM) तक इबादत का वक्त रहता है.

शब ए बरात  की विशेष नमाजें और दुआएं

शब-ए-बरात में कई लोग नफिल नमाज पढ़ते हैं. इसके अलावा, कुरान-ए-पाक की तिलावत और कसरत से 'अस्तगफार' (माफी की दुआ) पढ़ना इस रात का मुख्य हिस्सा है.

कब्रिस्तान की जियारत और अपनों की याद

एक पुरानी परंपरा के अनुसार, इस रात लोग कब्रिस्तान जाकर अपने मरहूम (दिवंगत) परिजनों की कब्रों पर फातिहा पढ़ते हैं और उनके लिए मगफिरत की दुआ करते हैं. दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में इस मौके पर कब्रिस्तानों में विशेष रोशनी और सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं.

शब ए बरातरोजा और रमजान की तैयारी

शब-ए-बरात के अगले दिन यानी 15 शाबान (4 फरवरी 2026) को रोजा रखना अच्छा माना जाता है. यह रात इस बात का भी संकेत है कि बरकतों वाला महीना 'रमजान' अब महज 15 दिन दूर है. लोग इस दिन घरों में हलवा और अन्य पकवान बनाकर गरीबों में बांटते हैं.

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