Sankashti Chaturthi 2026 Moon Rise Time: 3 या 4 जून, कब रखें विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत? जानें सही तारीख, पूजा विधि और अपने शहर में चंद्रोदय का समय
हिंदू धर्म में भगवान गणेश के भक्तों के लिए 'विभुवन संकष्टी चतुर्थी' का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. साल 2026 में यह विशेष व्रत बुधवार, 3 जून को रखा जा रहा है. चूंकि अधिक मास या मलमास में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को 'विभुवन संकष्टी चतुर्थी' कहा जाता है, जो हर तीन साल में एक बार आती है, इसलिए इसका आध्यात्मिक महत्व काफी अधिक है. संकष्टी व्रत में रात को चंद्रदर्शन और अर्घ्य देने का मुख्य नियम है। जानें दिल्ली, मुंबई, पुणे सहित प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का सटीक समय और पूजा विधि.
Sankashti Chaturthi 2026 Moon Rise Time: भगवान गणेश (Bhagwan Ganesh) के भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाने वाला 'विभुवन संकष्टी चतुर्थी' (Vibhuvan Sankashti Chaturthi) का उपवास इस वर्ष बुधवार, 3 जून 2026 को रखा जा रहा है. हिंदू धार्मिक ग्रंथों और पंचांग के अनुसार, अधिक मास या मलमास के दौरान आने वाली संकष्टी चतुर्थी को 'विभुवन संकष्टी चतुर्थी' के नाम से जाना जाता है. चूंकि यह दुर्लभ संयोग हर तीन साल में केवल एक बार आता है, इसलिए इस दिन का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व काफी बढ़ जाता है. संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) के व्रत में रात्रि के समय चंद्रदर्शन और चंद्रदेव को अर्घ्य देने का विशेष विधान है, जिसके बाद ही व्रत को पूर्ण माना जाता है. यह भी पढ़ें: Shivrajyabhishek Sohala 2026 Date: 353वां शिवराज्याभिषेक सोहळा, दुर्गराज रायगढ़ पर 5 और 6 जून को सजेगा ऐतिहासिक दरबार; जानें तारीख, महत्व और पूरा कार्यक्रम
तारीख को लेकर न हों भ्रमित, जानें सटीक मुहूर्त
इस वर्ष चतुर्थी तिथि दो दिनों (3 और 4 जून) को स्पर्श कर रही है, जिसके कारण श्रद्धालुओं के बीच उपवास की सही तारीख को लेकर थोड़ा संशय बना हुआ था. पंचांग गणना के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि बुधवार, 3 जून 2026 को रात 09:21 बजे शुरू हो रही है, जो अगले दिन गुरुवार, 4 जून 2026 को रात 11:30 बजे समाप्त होगी.
चूंकि संकष्टी चतुर्थी के व्रत का सीधा संबंध रात्रि के चंद्रोदय काल से होता है और 3 जून की रात को ही चतुर्थी तिथि के दौरान चंद्रोदय हो रहा है, इसलिए शास्त्रीय नियमों के आधार पर संकष्टी चतुर्थी का मुख्य उपवास बुधवार, 3 जून को ही रखा जाएगा.
3 जून 2026: देश के प्रमुख शहरों में चंद्रोदय (Moonrise) का समय
संकष्टी चतुर्थी का उपवास तब तक अधूरा माना जाता है जब तक रात को चंद्रदेव को अर्घ्य न दे दिया जाए. देश और राज्य के भौगोलिक स्थान के अनुसार अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर होता है.
3 जून को प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का प्रादेशिक समय इस प्रकार है:
- मुंबई: रात 09:50 बजे
- पुणे: रात 09:52 बजे
- नासिक: रात 09:51 बजे
- नागपुर: रात 09:35 बजे
- छत्रपति संभाजीनगर: रात 09:46 बजे
- नई दिल्ली: रात 09:45 बजे
- कोलकाता: रात 09:25 बजे
विभुवन संकष्टी का विशेष धार्मिक महत्व
तीन साल में एक बार आने वाले अधिक मास की इस चतुर्थी पर भगवान गणेश के 'विभुवन पालक' रूप की आराधना की जाती है, जिन्हें तीनों लोकों का रक्षक माना गया है. इस वर्ष इस तिथि पर बुधवार का दुर्लभ संयोग होने के कारण पूजा का फल कई गुना अधिक बढ़ गया है. श्रद्धालुओं के बीच यह दृढ़ विश्वास है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत और अर्चना करने से घर की आर्थिक तंगी दूर होती है, मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है और अटके हुए बड़े कार्यों के विघ्न समाप्त हो जाते हैं.
पूजा विधि और उपवास खोलने का नियम
विभुवन संकष्टी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान गणेश के सामने व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद पूजा के पाटे या चौकी पर पीला अथवा लाल कपड़ा बिछाकर उस पर मयूरेश्वर या गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित की जाती है.
बाप्पा को दूर्वा, मोदक, लाल फूल और चंदन अर्पित कर आरती की जाती है. दिनभर फलाहार रहकर उपवास किया जाता है और रात को अपने शहर के निर्धारित चंद्रोदय समय पर चांदी के पात्र से दूध और जल मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है, जिसके बाद बप्पा का प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोला जाता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 03, 2026 11:46 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

