Narasimha Jayanti 2025 Messages: नरसिंह जयंती की हार्दिक बधाई! प्रियजनों संग शेयर करें ये हिंदी WhatsApp Wishes, Quotes और GIF Greetings
नरसिंह जयंती के दिन भगवान नृसिंह की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों के सारे संकट दूर होते हैं. इस पर्व को मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है और इस दिन शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान भी किया जाता है. ऐसे में इस खास अवसर पर आप भी इन हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, कोट्स, जीआईएफ ग्रीटिंग्स को प्रियजनों संग शेयर करके उन्हें नरसिंह जयंती की हार्दिक बधाई दे सकते हैं.
Narasimha Jayanti 2025 Messages in Hindi: नरसिंह जयंती (Narsingh Jayanti) का हिंदू धर्म विशेष महत्व बताया जाता है, जो भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) के उग्र स्वरूप भगवान नृसिंह को समर्पित है. इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्तों की रक्षा के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरसिंह जयंती मनाई जाती है, जबकि ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से इस साल 11 मई 2025 को यह त्योहार मनाया जा रहा है. नरसिंह जयंती को नृसिंह जयंती और नरसिम्हा जयंती (Narasimha Jayanti) के तौर पर भी जाना जाता है. भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह का आधा शरीर मानव और आधा शरीर सिंह का है, इसलिए उन्हें नृसिंह कहा जाता है. भगवान नृसिंह ने न सिर्फ अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी, बल्कि उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध करके बुराई का भी अंत किया था.
नरसिंह जयंती के दिन भगवान नृसिंह की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों के सारे संकट दूर होते हैं और उनकी समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस पर्व को मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है और इस दिन शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान भी किया जाता है. ऐसे में इस खास अवसर पर आप भी इन हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, कोट्स, जीआईएफ ग्रीटिंग्स को प्रियजनों संग शेयर करके उन्हें नरसिंह जयंती की हार्दिक बधाई दे सकते हैं.





इस पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप ने भगवान ब्रह्मा की तपस्या करके देवता, मनुष्य, अस्त्र-शस्त्र या पशु आदि से न मरने का वरदान प्राप्त किया था. ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने के बाद वो अपनी पूजा करवाने लगा और जो नहीं करता, उसे कठोर दंड देने लगा. वहीं हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे और वो हमेशा श्रीहरि की भक्ति में लीन रहते थे और ये चीज उनके पिता हिरण्यकश्यप को पसंद नहीं थी.
ऐसे में वो अपने पुत्र को तरह-तरह का कष्ट देने लगा और मारने का प्रयास भी किया. ऐसे में अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह का अवतार लिया और खंभे से प्रकट होकर उन्होंने अपनी जांघों पर लेकर पल भर में हिरण्यकश्यप के सीने को अपने नाखूनों से फाड़कर उसका संहार कर दिया. कहा जाता है कि तब से बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर इस पर्व को मनाया जाने लगा.
(The above story first appeared on LatestLY on May 11, 2025 06:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

