Smriti Jain Jaisalmer Case MMS: जैसलमेर वायरल वीडियो के नाम पर साइबर ठगी का जाल, फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही खाली हो सकता है बैंक खाता; रहें सावधान
जैसलमेर के हालिया विवादित मामले से जोड़कर सोशल मीडिया पर 'स्मृति जैन एमएमएस' के नाम से कई संशयास्पद लिंक्स शेयर की जा रही हैं. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ये लिंक्स असल में वित्तीय धोखाधड़ी और डेटा चोरी के लिए फैलाया गया एक साइबर जाल हो सकती हैं.
Smriti Jain Jaisalmer Case MMS: राजस्थान के जैसलमेर में हाल ही में सामने आए विवादित मामले के बाद सोशल मीडिया और मेसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर इससे जुड़ी वीडियो लिंक्स तेजी से शेयर की जा रही हैं. इंटरनेट पर 'स्मृति जैन जैसलमेर केस वीडियो लिंक' (Smriti Jain Jaisalmer Case MMS Link) जैसे शीर्षकों के साथ यूजर्स को लुभाने की कोशिश की जा रही है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि ये लिंक्स गंभीर साइबर फ्रॉड का हिस्सा हो सकती हैं. इन पर क्लिक करने से यूजर्स के स्मार्टफोन या कंप्यूटर का डेटा चोरी होने और बैंक खाता पूरी तरह खाली होने का बड़ा खतरा है.
मानवीय उत्सुकता का फायदा उठा रहे साइबर अपराधी
जब भी कोई गंभीर या सनसनीखेज मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनता है, तो साइबर अपराधी अक्सर उसका फायदा उठाने के लिए सक्रिय हो जाते हैं. इस मामले में भी लोगों की उत्सुकता को हथियार बनाया जा रहा है. व्हाट्सएप, टेलीग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी अनधिकृत लिंक्स भेजी जा रही हैं, जिनमें वीडियो दिखाने का दावा किया जाता है. वास्तव में, ये लिंक्स यूजर्स को किसी सुरक्षित वीडियो प्लेयर पर ले जाने के बजाय एक फर्जी या मैलिशियस (हानिकारक) वेबसाइट पर रीडायरेक्ट कर देती हैं. यह भी पढ़े: साइबर ठगों पर CBI का बड़ा वार, फर्जी नोटिस की पहचान के लिए लॉन्च किया AI हेल्पबॉट ‘ABHAY’
कैसे काम करता है यह वित्तीय धोखाधड़ी का जाल
इन संशयास्पद लिंक्स पर क्लिक करते ही यूजर्स के सामने अक्सर एक स्क्रीन खुलती है, जिसमें वीडियो डाउनलोड करने के लिए किसी अज्ञात फाइल (APK File) को इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है. जैसे ही यूजर इसे डाउनलोड करता है, मोबाइल में एक छिपा हुआ मैलवेयर या स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो जाता है. यह सॉफ्टवेयर यूजर की वित्तीय जानकारी, नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, पासवर्ड और सबसे महत्वपूर्ण बात, बैंक ट्रांजैक्शन के लिए आने वाले ओटीपी (OTP) को चुपके से रीडायरेक्ट कर साइबर अपराधियों तक पहुंचा देता है. इसके बाद पलक झपकते ही बैंक खातों से पैसे साफ कर दिए जाते हैं.
डेटा चोरी और ब्लैकमेलिंग का गंभीर जोखिम
वित्तीय नुकसान के अलावा, इन फिशिंग लिंक्स के जरिए पर्सनल डेटा चोरी होने का भी बड़ा रिस्क रहता है. मैलवेयर इंस्टॉल होने के बाद हैकर्स को यूजर की गैलरी, कॉन्टैक्ट लिस्ट और पर्सनल मैसेज का एक्सेस मिल जाता है. इस चुराए गए डेटा का इस्तेमाल बाद में यूजर्स को ब्लैकमेल करने या उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल (Identity Theft) करने के लिए किया जा सकता है. ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर थोड़ी सी भी लापरवाही नागरिकों के लिए बड़ी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सबब बन सकती है.
साइबर सुरक्षा से जुड़े जरूरी एहतियात
किसी भी अज्ञात या अनधिकृत सोर्स से आई ऐसी किसी भी लिंक पर कभी भी क्लिक न करें. किसी भी सनसनीखेज या आक्षेपार्ह दावे वाले मैसेज को बिना जांचे-परखे दूसरों को फॉरवर्ड करने से बचें. अगर अनजाने में किसी ऐसी लिंक पर क्लिक हो गया है और बैंक से अनधिकृत पैसे कटने का मैसेज आता है, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित कर खाते और कार्ड को ब्लॉक करवाएं. इसके तुरंत बाद केंद्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) या राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके.
(The above story first appeared on LatestLY on May 31, 2026 08:31 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

