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प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना वाली बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को रिटायर्ड जजों, नौकरशाहों ने 'ब्रिटिश साम्राज्य के पुनरुत्थान का भ्रम' बताया

सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, नौकरशाहों और सशस्त्र बलों के दिग्गजों के एक समूह ने शनिवार को एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाली बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को 'ब्रिटिश साम्राज्य के पुनरुत्थान का भ्रम' बताया.

प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना वाली बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को रिटायर्ड जजों, नौकरशाहों ने 'ब्रिटिश साम्राज्य के पुनरुत्थान का भ्रम' बताया
पीएम मोदी (Photo Credits PTI)

नई दिल्ली, 22 जनवरी : सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, नौकरशाहों और सशस्त्र बलों के दिग्गजों के एक समूह ने शनिवार को एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की आलोचना करने वाली बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को 'ब्रिटिश साम्राज्य के पुनरुत्थान का भ्रम' बताया. पत्र में कहा गया है, "इस बार नहीं. हमारे नेता के साथ नहीं. भारत के साथ नहीं. हमारी निगरानी में कभी नहीं!"

"एक बार फिर, भारत के प्रति बीबीसी की नकारात्मकता और कठोर पूर्वाग्रह एक वृत्तचित्र के रूप में फिर से सामने आया है, 'इंडिया : द मोदी क्वेश्चन'. उच्चतम संपादकीय मानकों के अनुसार, और 'भारत के हिंदू बहुमत और मुस्लिम अल्पसंख्यक के बीच तनाव की जांच करता है और उन तनावों के संबंध में भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की राजनीति की पड़ताल करता है और उनके द्वारा लागू की गई विवादास्पद नीतियों की एक श्रृंखला है." यह भी पढ़ें : Republic Day Parade: गणतंत्र दिवस परेड के मद्देनजर गौतम बुद्ध नगर से दिल्ली जाने वाले भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित

आगे कहा गया है, "तो अब हमारे पास भारत में ब्रिटिश अतीत के साम्राज्यवाद का आदर्श है, जो खुद को न्यायाधीश और जूरी दोनों के रूप में स्थापित कर रहा है, हिंदू-मुस्लिम तनावों को फिर से जीवित करने के लिए, जो ब्रिटिश राज की फूट डालो और राज करो की नीति का निर्माण कर रहे थे. बीबीसी की सीरीज भ्रमपूर्ण और स्पष्ट रूप से एकतरफा रिपोर्टिग के आधार पर बनी है. हमने इसे अब तक जो देखा है, उसे देखते हुए यह एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में भारत के अस्तित्व के 75 साल पुराने भवन की बुनियाद पर सवाल उठाता है, एक ऐसा राष्ट्र जो भारत के लोगों की इच्छा के अनुसार चलता है. सीरीज में स्पष्ट रूप से तथ्यात्मक त्रुटियों के अलावा, 'कथित रूप से' और 'कथित तौर पर' शब्दों का बार-बार उपयोग किया गया है (तथ्यात्मक रूप से नहीं) - इससे प्रेरित विकृति की बू आती है जो निराधार है, क्योंकि यह है नापाक."

13 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, 133 सेवानिवृत्त नौकरशाहों और 156 सेवानिवृत्त सशस्त्र बलों के कर्मियों सहित कुल 302 प्रतिष्ठित नागरिकों ने पत्र पर हस्ताक्षर किए. हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व विदेश सचिव शशांक, पूर्व गृह सचिव एल.सी. गोयल, रॉ के पूर्व प्रमुख संजीव त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओ.पी. सिंह सहित अन्य शामिल हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों की वर्षो की कड़ी जांच के बाद शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को बरकरार रखा था. पत्र ने कहा, "तो अब हमारे पास एक ब्रिटिश मीडिया संगठन बीबीसी है, जो स्वाभाविक रूप से सनसनीखेज बातें फैलाता है, भले ही इसका आधार कितना भी झूठा क्यों न हो, खुद को दूसरे अनुमान के लिए स्थापित करता है और भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को खारिज करता है. बीबीसी की दुर्भावना और इस सीरीज के पीछे की प्रेरणाओं पर सवाल उठाने के लिए हमें प्रेरित करती है."

पत्र में कहा गया है, 'इंडिया : द मोदी क्वेश्चन' शीर्षक से एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के बजाय, बीबीसी को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपने स्वयं के पूर्वाग्रहों पर सवाल उठाना चाहिए और 'बीबीसी : द एथिकल क्वेश्चन' नामक एक डॉक्यूमेंट्री बनानी चाहिए." पत्र में लोगों से एक याचिका पर हस्ताक्षर करने का भी आग्रह किया गया है. पत्र के अंत में कहा गया है, "बीबीसी की सीरीज के खिलाफ लड़ाई में इस याचिका पर हस्ताक्षर करके हमसे जुड़ें. हम इसे यहां से शुरू करते हैं और हम इसे अपने भारी 'सत्याग्रह' के माध्यम से प्रदर्शित करते हुए समाप्त करते हैं, हमारी सच्ची शक्ति : हमारी देशभक्ति."

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 22, 2023 08:39 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).