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Pune Water Cut: पानी संकट के बीच PMC का बड़ा कदम, एक दिन छोड़कर होगी सप्लाई; स्विमिंग पूल और व्हीकल वॉशिंग सेंटर बंद करने के आदेश

पुणे नगर निगम (PMC) ने बांधों में पानी के घटते स्तर और मॉनसून में देरी को देखते हुए सोमवार, 15 जून 2026 से पूरे शहर में एक दिन छोड़कर (alternate day) पानी की सप्लाई करने का फैसला किया है. इसके साथ ही कमर्शियल गतिविधियों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं.

Pune Water Cut: पानी संकट के बीच PMC का बड़ा कदम, एक दिन छोड़कर होगी सप्लाई;  स्विमिंग पूल और व्हीकल वॉशिंग सेंटर बंद करने के आदेश
(Photo Credits: pixabay)

Pune Water Cut: पुणे शहर में पानी की गंभीर किल्लत को देखते हुए पुणे नगर निगम (PMC) आज यानी सोमवार, 15 जून से पूरे शहर में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति करने की व्यवस्था लागू करने जा रहा है. महाराष्ट्र जल संसाधन विभाग के निर्देशों के बाद प्रशासन ने यह कड़ा कदम उठाया है. एल नीनो (El Niño) के प्रभाव और मॉनसून की धीमी रफ्तार के कारण शहर को पानी देने वाले जलाशयों का जलस्तर तेजी से नीचे गिरा है, जिसकी वजह से पानी की राशनिंग अनिवार्य हो गई है.

बांधों में बचा केवल 5 TMC पानी

पुणे शहर को मुख्य रूप से चार प्रमुख बांधों से पानी मिलता है. इनमें खड़कवासला, पानशेत, वरसगांव और टेमघर शामिल हैं. वर्तमान में इन चारों जलाशयों में सामूहिक रूप से केवल 5 अरब घनफूट (TMC) पानी बचा है. इस कुल स्टॉक में से भी केवल 3 TMC पानी ही पूरी तरह से शहरी इस्तेमाल के लिए उपलब्ध और सुरक्षित माना जा रहा है.

नगर निगम फिलहाल रोजाना 1,550 मिलियन लीटर (MLD) पानी की निकासी करता है. नई नीति के तहत इस खपत में रोजाना 400 MLD की कटौती की जाएगी. प्रशासन का लक्ष्य है कि बचे हुए पानी को हर हाल में 20 अगस्त 2026 तक चलाया जा सके, ताकि मॉनसून के स्थिर होने तक शहर में हाहाकार न मचे.

कमर्शियल इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध

घरेलू जल आपूर्ति में कटौती के साथ ही नगर निगम आयुक्त नवल किशोर राम ने गैर-जरूरी और व्यावसायिक कार्यों के लिए पानी के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. नए आदेश के तहत शहर के सभी कमर्शियल वाहन धुलाई केंद्र (washing centres) और सरकारी व निजी स्विमिंग पूल बंद रहेंगे.

इसके अलावा, रियल एस्टेट डेवलपर्स और निर्माण स्थलों पर नगर निगम के पीने वाले पानी के इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है. बिल्डरों को अब केवल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से साफ किए गए पानी, बोरवेल या निजी कुओं के पानी का ही उपयोग करना होगा.

हाउसिंग सोसायटियों-होटलों के लिए रीसाइकिलिंग अनिवार्य

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल इस क्षेत्र में मॉनसून की कुल बारिश ऐतिहासिक औसत की तुलना में 90 से 95 प्रतिशत या उससे भी कम रह सकती है. इस स्थिति से निपटने के लिए पीएमसी ने रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए कुछ नियम तय किए हैं.

  • हाउसिंग सोसायटियां: सभी बड़ी आवासीय सोसायटियों को अपने आंतरिक एसटीपी (STP) को पूरी तरह चालू रखना होगा और रीसाइकिल किए गए पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना होगा.

  • व्यावसायिक प्रतिष्ठान: होटलों, रेस्टोरेंटों और छात्र हॉस्टलों को अपनी पानी की खपत घटानी होगी. उन्हें बागवानी और लैंडस्केपिंग के लिए इस्तेमाल किए जा चुके पानी (greywater) को दोबारा उपयोग में लाना होगा.

पाइपलाइन फटने से बचाने के लिए चरणबद्ध तरीके से लागू होगा नियम

पीएमसी के इंजीनियरों के अनुसार, यह नई व्यवस्था पूरे शहर में क्षेत्रवार और चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है. पाइपलाइन नेटवर्क के भीतर बार-बार पानी खाली होने और भरने से हवा का दबाव (fluid pressure) बदलता है, जिससे मुख्य लाइन फटने का खतरा रहता है. इसलिए तकनीकी सावधानी बरती जा रही है.

भामा आस्खेड़ बांध से जुड़े इलाकों को इस तात्कालिक कटौती से थोड़ी राहत दी गई है, क्योंकि वहां के निवासी फिलहाल पानी में अत्यधिक गंदलेपन (turbid water) की समस्या का सामना कर रहे हैं.

पुणे की मेयर मंजूषा नागपुरे ने शहरवासियों से पानी की बर्बादी रोकने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है. उन्होंने निजी टैंकर ऑपरेटरों को भी चेतावनी दी है कि वे इस संकट के समय पानी के दामों में मनमानी बढ़ोतरी न करें. प्रशासन ने इससे पहले साल 2013-14 के भीषण सूखे के दौरान भी शहर में सालभर की लंबी पानी कटौती लागू की थी.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 15, 2026 08:27 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).