West Bengal Result 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव रिजल्ट पर फलोदी सट्टा बाजार का बड़ा संकेत, ममता बनर्जी को नुकसान, BJP को मिल सकता है बहुमत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले फलोदी सट्टा बाजार के ताजा अनुमानों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. लेटेस्ट ट्रेंड्स में भाजपा को बहुमत मिलने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि टीएमसी के ग्राफ में गिरावट देखी गई है.

(Photo Credits ANI)

West Bengal Result 2026:  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सट्टा बाजार के समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले राजस्थान के प्रसिद्ध फलोदी सट्टा बाजार (Phalodi Satta Bazar Prediction) ने अपने ताजा आकलन में एक बड़ा 'यू-टर्न' लिया है. मतदान के शुरुआती चरणों के बाद जो रुझान सामने आए हैं, उन्होंने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है.

भाजपा को बढ़त और टीएमसी के ग्राफ में गिरावट

फलोदी सट्टा बाजार के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है. ताजा अनुमानों में भाजपा को 150 से 152 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. यह आंकड़ा पूर्ण बहुमत के जादुई आंकड़े को पार करता नजर आ रहा है.  यह भी पढ़े: West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल के 15 बूथों पर दोबारा मतदान, कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच डाले जा रहे वोट, EVM में गड़बड़ी के लगे थे आरोप; VIDEO

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगता दिख रहा है. सट्टा बाजार अब ममता बनर्जी की पार्टी को 137 से 140 सीटों के बीच सिमटता हुआ देख रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले यही बाजार टीएमसी को स्पष्ट विजेता मान रहा था और भाजपा को महज 100 सीटों के आसपास आंक रहा था.

ममता बनर्जी की सीट पर बदलता समीकरण

हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट पर भी सट्टा बाजार का मिजाज बदल गया है. यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच कड़ी टक्कर है. बाजार में ममता बनर्जी का भाव 20-25 पैसे से बढ़कर 50 पैसे तक पहुंच गया है. सट्टा बाजार की भाषा में भाव का बढ़ना जीत की संभावना कम होने का संकेत माना जाता है.

अन्य राज्यों का चुनावी रुझान

फलोदी सट्टा बाजार ने केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी अनुमान जारी किए हैं:

सट्टा बाजार के दावों की जमीनी हकीकत

जानकारों का मानना है कि भारी मतदान अक्सर सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का संकेत होता है, जिसे सट्टा बाजार अपनी गणना का आधार बना रहा है. हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सट्टा बाजार के अनुमान केवल संभावनाओं पर आधारित होते हैं और आधिकारिक चुनाव परिणामों से इनका कोई वैधानिक संबंध नहीं होता है.

4 मई को होने वाली मतगणना ही यह स्पष्ट करेगी कि बंगाल की जनता ने किसे सत्ता की चाबी सौंपी है. तब तक राजनीतिक गलियारों में दावों और प्रति-दावों का दौर जारी रहने की उम्मीद है.

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