मोदी सरकार ने दिया नौकरीपेशा लोगों को बड़ा झटका, PF पर घटाई ब्याज दर; ऐसे पड़ेगा असर
केंद्र की मोदी सरकार ने नौकरीपेशा लोगों को बड़ा झटका दिया है. बताना चाहते है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पीएफ पर 8.65 फीसदी के बजाय अब 8.5 प्रतिशत ब्याज देने का फैसला किया है. यह जानकारी श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने दी है. उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार (Modi Government) ने पिछले साल दिवाली से पहले नौकरीपेशा लोगों को बड़ा तोहफा देते हुए वित्त वर्ष 2019-19 के लिए 8.65 प्रतिशत की दर से ब्याज देने का ऐलान किया था.
नई दिल्ली. केंद्र की मोदी सरकार ने नौकरीपेशा लोगों को बड़ा झटका दिया है. बताना चाहते है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पीएफ पर 8.65 फीसदी के बजाय अब 8.5 प्रतिशत ब्याज देने का फैसला किया है. यह जानकारी श्रम मंत्री संतोष गंगवार (Union Labour Minister Santosh Gangwar) ने दी है. उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार (Modi Government) ने पिछले साल दिवाली से पहले नौकरीपेशा लोगों को बड़ा तोहफा देते हुए वित्त वर्ष 2019-19 के लिए 8.65 प्रतिशत की दर से ब्याज देने का ऐलान किया था.
जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय न्यासी बोर्ड ही पीएफ पर ब्याज दर को लेकर अंतिम निर्णय लेता है. साथ ही वित्त मंत्रालय की सहमति इस निर्णय को लेने के लिए जरूरी है. वही ईपीएफओ ने ग्राहकों को वर्ष 2016-17 में 8.65 फीसदी और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत ब्याज दिया था. जबकि 2015-16 में 8.8 प्रतिशत का अधिक ब्याज दिया गया था. वर्ष 2013-14 और 2014-15 की अगर बात करें तो ईपीएफ पर 8.75 प्रतिशत का ब्याज दिया गया था.यह भी पढ़े-खुशखबर: पीएफ पर मोदी सरकार ने बढ़ाई ब्याज दर, अब EPFO पर मिलेगा 8.65 फीसदी इंटरेस्ट
ANI का ट्वीट-
Union Labour Minister Santosh Gangwar: Central Board of Trustees have decided to decrease the rate of employees provident fund to 8.5% for 2019-2020. Earlier it was 8.65% pic.twitter.com/wstu4tWXdh
— ANI (@ANI) March 5, 2020
ज्ञात हो कि कटौती का अंदेशा पहले ही लगाया गया था. इस मसले पर पर ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने गुरूवार को एक बैठक कर अपने फैसले पर मुहर लगाई है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 05, 2020 01:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

