Pandharpur Muslims: पंढरपुर में सौहार्द की मिसाल, एकादशी के चलते मुस्लिम समुदाय ने बकरीद के जश्न को टाला, कहा- 'हमारे दिलों में भी बसते हैं पांडुरंग'
महाराष्ट्र के पवित्र तीर्थस्थल पंढरपुर में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल सामने आई है. स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने पुरुषोत्तम अधिकमास की एकादशी के चलते बुधवार को मनाई जाने वाली बकरीद के जश्न और कुर्बानी को टालने का ऐतिहासिक फैसला किया है.
Pandharpur Muslims: महाराष्ट्र के प्रसिद्ध तीर्थस्थल पंढरपुर में हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी सम्मान की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है. देश भर में जहां बुधवार को बकरीद (ईद-उल-अजहा) का त्योहार मनाया जा रहा है, वहीं पंढरपुर के मुस्लिम समुदाय ने इस दिन को न मनाने का फैसला किया है. दरअसल, इस साल बकरीद का त्योहार पुरुषोत्तम अधिकमास (कमला एकादशी) के ही दिन पड़ा है, जिसमें भगवान विठ्ठल के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में वारकरी और श्रद्धालु पंढरपुर पहुंचते हैं. भक्तों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए स्थानीय मुस्लिमों ने ईद की नमाज और पशुओं की कुर्बानी को एक से दो दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया है.
वारकरी परंपरा का सम्मान
एनडीटीवी मराठी की रिपोर्ट के अनुसार, कमला एकादशी के पावन अवसर पर पंढरपुर के विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में करीब 4 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे हैं. वारकरी संप्रदाय की परंपराओं में एकादशी के दिन पूरी तरह से सात्विक रहने और मांस से दूर रहने का नियम है. चूंकि पूरा शहर इस समय पूरी तरह भक्तिमय है, इसलिए स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इस पावन दिन पर कुर्बानी देना उचित नहीं होगा. यह भी पढ़े: Amalaki Ekadashi 2026: आज मनाया जा रहा है रंगभरी एकादशी का महापर्व; जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पारण का समय
'मना मना पांडुरंग' (दिलों में बसते हैं विठ्ठल)
स्थानीय मुस्लिम प्रतिनिधियों ने इस फैसले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भगवान पांडुरंग (विठ्ठल) के प्रति उनकी भी गहरी आस्था है. उन्होंने कहा कि यह एक पवित्र तीर्थक्षेत्र है और अधिकमास की इस पावन तिथि पर जब लाखों श्रद्धालु यहां उपस्थित हैं, तो उनके सम्मान में त्योहार को आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है. मुस्लिम समुदाय के इस कदम की स्थानीय निवासियों और बाहर से आए श्रद्धालुओं द्वारा जमकर सराहना की जा रही है.
पंढरपुर की पुरानी ऐतिहासिक परंपरा
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि पंढरपुर में यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है. अतीत में भी जब कभी एकादशी और ईद का त्योहार एक ही दिन पड़ा है, तब-तब यहां के मुस्लिम समुदाय ने सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए हमेशा अपनी सामूहिक प्रार्थनाओं और कुर्बानी के समय को बदला है. इस बार भी ईद के सभी धार्मिक अनुष्ठान एकादशी के अगले दिन यानी गुरुवार या शुक्रवार को संपन्न किए जाएंगे.
मुंबई और अन्य क्षेत्रों से बिल्कुल विपरीत तस्वीर
यह सराहनीय घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र के ही कुछ अन्य हिस्सों, विशेष रूप से मुंबई और मीरा रोड जैसे इलाकों में बकरीद के दौरान कुर्बानी की व्यवस्था को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव और विवाद की खबरें आई थीं. उन विवादों के बीच पंढरपुर ने पूरे देश के सामने आपसी सह-अस्तित्व और धार्मिक संवेदनशीलता का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करता है.
(The above story first appeared on LatestLY on May 27, 2026 03:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

