NEET UG 2026 Re-Exam: परीक्षा रद्द करने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का तुरंत सुनवाई से इनकार, जुलाई में होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने के एनटीए (NTA) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई अब जुलाई में अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ होगी.
NEET UG 2026 Re-Exam: सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नीट-यूजी (NEET-UG 2026) परीक्षा को रद्द करने और करीब 22 लाख छात्रों के लिए देशव्यापी पुनर्मात परीक्षा (Re-test) आयोजित करने के फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष जब इस मामले को त्वरित सूचीबद्ध करने के लिए लाया गया, तब कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर जून में कोई आपातकालीन सुनवाई नहीं होगी. अब इस मामले को जुलाई में सुना जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित सुनवाई से क्यों किया इनकार?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज करते हुए कहा कि नीट-यूजी 2026 से जुड़ी अन्य याचिकाएं पहले से ही जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष विचाराधीन हैं. सीजेआई ने टिप्पणी की कि चूंकि इस विषय से जुड़े अन्य मामलों पर एक अलग बेंच विचार कर रही है, इसलिए वर्तमान याचिका को भी उसी बेंच के सामने जुलाई में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा.
यह याचिका स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की पूर्व सहायक महानिदेशक डॉ. मंगला कोहली द्वारा एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अभिषेक चंद्र मिश्रा के माध्यम से दायर की गई थी. इस याचिका में 3 मई को आयोजित हुई मूल परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने के एनटीए के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं.
याचिकाकर्ता की दलील
याचिका में तर्क दिया गया है कि परीक्षा में गड़बड़ी और धोखाधड़ी के आरोपों की कड़ी जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. हालांकि, परीक्षा कराने वाली एजेंसी की प्रशासनिक और संस्थागत विफलताओं के कारण लाखों ईमानदार और मेधावी छात्रों के संवैधानिक अधिकारों और हितों की बलि नहीं दी जा सकती.
याचिका के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच से अब तक यह संकेत मिले हैं कि पेपर लीक का मामला कुछ विशिष्ट संगठित नेटवर्कों तक ही सीमित था, न कि पूरे देश में परीक्षा की शुचिता बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई थी. याचिका में कहा गया है कि परीक्षा को पूरी तरह रद्द करके एनटीए ने 22 लाख छात्रों को मानसिक, शैक्षणिक और वित्तीय संकट में डाल दिया है, जिनका इस कथित कदाचार से कोई लेना-देना नहीं था. इसके साथ ही याचिका में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में डिजिटल प्रश्नपत्र वितरण, बायोमेट्रिक सत्यापन और एआई-आधारित निगरानी जैसे तकनीकी सुधारों की भी मांग की गई है.
21 जून को पेन-एंड-पेपर मोड में ही होगी परीक्षा
इससे पहले जून महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को आगामी 21 जून की परीक्षा कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने का निर्देश देने से भी इनकार कर दिया था. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने कहा था कि इस स्तर पर परीक्षा के तौर-तरीकों को बदलना संभव नहीं है, क्योंकि अधिकारी पहले से ही परीक्षा की तैयारियों में जुटे हैं.
तय कार्यक्रम के अनुसार, नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा 21 जून को अपने पुराने पेन-एंड-पेपर (ऑफलाइन) फॉर्मेट में ही आयोजित की जाएगी. इसके लिए छात्रों के एडमिट कार्ड भी जारी किए जा चुके हैं.
एनटीए महानिदेशक का आश्वासन
इस बीच, एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी कर सभी परीक्षार्थियों को आश्वासन दिया है कि पुनरीक्षा पूरी तरह सुरक्षित और त्रुटिहीन तरीके से आयोजित की जाएगी. उन्होंने छात्रों और अभिभावकों को सोशल मीडिया पर सक्रिय उन गिरोहों से सावधान रहने की चेतावनी दी है, जो भारी रकम के बदले "लीक हुए प्रश्नपत्र" बेचने का झूठा दावा कर रहे हैं.
महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि दोबारा होने वाली परीक्षा का कोई पेपर लीक नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि टेलीग्राम जैसे ऐप्स पर चल रहे फर्जी दावों और अफवाहों को रोकने के लिए ही इस एप्लिकेशन को 22 जून तक अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है. इसके अलावा, प्रश्नपत्रों के सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) की रसद सहायता ली जा रही है, ताकि परीक्षा रद्द होने के 37 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया जा सके.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 17, 2026 01:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

