West Bengal Politics: बंगाल के प्रशासनिक समीकरण में बड़ा शिफ्ट; सीएम शुभेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल हुए TMC के दो बागी सांसद और एक विधायक
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक पटल पर एक बड़ा और अभूतपूर्व घटनाक्रम सामने आया है. पूर्व मेदिनीपुर के कोलाघाट में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक समीक्षा बैठक में तृणमूल कांग्रेस के दो बागी लोकसभा सांसद—अभिनेता देव और अभिनेत्री जून मालिया—सहित एक पार्टी विधायक सिउली साहा शामिल हुए.
कोलकाता, 9 जून: पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण शिफ़्ट देखने को मिला है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के नेतृत्व के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने वाले दो लोकसभा सांसद और पार्टी की एक प्रमुख विधायक मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) की अध्यक्षता में आयोजित एक आधिकारिक प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुए. भारत-एशियन न्यूज सर्विस (IANS) के अनुसार, पूर्व मेदिनीपुर जिले के कोलाघाट में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक का उद्देश्य तीन प्रमुख जिलों—पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम—के प्रशासनिक कामकाज और विकास परियोजनाओं की समीक्षा करना था. राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन के बाद विपक्ष के इन बड़े चेहरों की मुख्यमंत्री के साथ मौजूदगी ने सियासी हलचल तेज कर दी है. यह भी पढ़ें: Suvendu Adhikari Net Worth: सुवेंदु अधिकारी आज लेंगे CM पद की शपथ, जानें कितनी है 'बंगाल के होने वाले नए मुख्यमंत्री' की कुल संपत्ति
बैठक में शामिल हुए घाटाल के सांसद देव और मेदिनीपुर की जून मालिया
इस प्रशासनिक बैठक में भाग लेने वाले तृणमूल कांग्रेस के दो लोकसभा सदस्यों में घाटाल संसदीय क्षेत्र से अभिनेता व राजनेता दीपक अधिकारी (जिन्हें लोकप्रिय रूप से देव के नाम से जाना जाता है) और मेदिनीपुर लोकसभा सीट से अभिनेत्री व राजनेता जून मालिया शामिल थीं. उल्लेखनीय है कि ये दोनों ही महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र पश्चिम मेदिनीपुर जिले के अंतर्गत आते हैं.
इन दोनों सांसदों के अलावा, बैठक में तृणमूल कांग्रेस की विधायक सिउली साहा भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहीं. सिउली साहा वर्तमान में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष की उपनेता (Deputy Leader of the Opposition) हैं. वे सदन में निष्कासित पार्टी विधायक रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल विधायी दल के बागी गुट का एक बेहद प्रमुख और मुखर चेहरा मानी जाती हैं.
अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ टीएमसी में बड़ी बगावत
प्रशासनिक बैठक में इन नेताओं की उपस्थिति को बंगाल टीएमसी के भीतर चल रही तीव्र अंदरूनी कलह से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, सांसद देव और जून मालिया तृणमूल कांग्रेस के उन 20 लोकसभा सदस्यों के शक्तिशाली समूह का हिस्सा हैं, जिन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के सांगठनिक नेतृत्व को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है.
वरिष्ठ सांसदों काकोली घोष दस्तिदार और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में चल रहे इस बागी ब्लॉक की बगावत के बीच, टीएमसी के जनप्रतिनिधियों का सीधे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकारी बैठक में मंच साझा करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी के भीतर सांगठनिक स्तर पर दरार कितनी गहरी हो चुकी है.
विपक्ष को आमंत्रित करने की 15 साल पुरानी व्यवस्था को किया पुनर्जीवित
पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से, शुभेंदु अधिकारी ने राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली में एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है. उन्होंने अपनी सभी जिला-स्तरीय प्रशासनिक समीक्षा बैठकों में विपक्ष के सांसदों और विधायकों सहित सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की एक नई और समावेशी परंपरा शुरू की है.
मुख्यमंत्री अधिकारी का तर्क है कि जिला प्रशासन और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के बीच आपसी तालमेल और कड़े समन्वय के बिना किसी भी सुचारू प्रशासनिक कामकाज या जनकल्याणकारी नीतियों को धरातल पर उतारना संभव नहीं है, चाहे वे प्रतिनिधि सत्ताधारी दल के हों या विपक्ष के. यह भी पढ़ें: West Bengal CM Oath Ceremony LIVE: बंगाल में BJP के लिए बड़ा दिन, सुवेंदु अधिकारी आज सुबह 11 बजे सीएम पद की लेंगे शपथ, PM मोदी, अमित शाह समेत कई बड़े नेता होंगे शामिल
वामपंथ के दौर की परंपरा की वापसी; ममता बनर्जी ने लगा दी थी रोक
ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो विपक्षी सांसदों और विधायकों को प्रशासनिक स्तर पर शामिल करने की यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पश्चिम बंगाल में कोई नई नहीं है. साल 1977 से 2011 तक चले 34 वर्षों के वाम मोर्चा (Left Front) के शासनकाल के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्रियों—ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य—द्वारा इस सहयोगात्मक प्रणाली का कड़ाई से पालन किया जाता था.
हालांकि, साल 2011 से 2026 तक चले पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के कार्यकाल के दौरान इस प्रथा को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था, और विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को प्रशासनिक बैठकों से पूरी तरह अलग रखा जाता था. अब, राज्य में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नवगठित भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार ने इस पुरानी समन्वय प्रणाली को आधिकारिक रूप से पुनर्जीवित (Resurrected) कर दिया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 09, 2026 07:29 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

