7th Pay Commission: सर्विस के दौरान मौत होने पर जानें कितना मिलता है डेथ ग्रैच्युटी का फायदा
रुपया (Photo Credits: Wikimedia Commons)

7th Pay Commission News: देशभर के लाखों सरकारी कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी (Basic Salary) में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. हालांकि पिछले कुछ समय में सरकार ने सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की सिफारिशों के अनुरूप ग्रेच्युटी (Gratuity) के नियमों में बड़े बदलाव किए है. इसी क्रम में हम आपकों डेथ ग्रेच्युटी (Death Gratuity) भुगतान से जुड़ी कुछ बेहद जरुरी बाते बताने जा रहे है. जिसका फायदा कर्मचारियों के परिजनों को मिलेगा.

यदि सरकारी कर्मचारी की किसी भी परिस्थिति में मृत्यु सेवा में रहते हुए हो जाती है, तो डेथ ग्रेच्युटी का भुगतान उसके परिवार को किया जाता है. अगर किसी कर्मचारी की सर्विस के एक वर्ष से कम समय में मौत हो जाती है तो उसके परिजनों को मौजूदा कुल मेहनताना का दो गुना ग्रैच्युटी का फायदा दिया जाता है. वहीं अगर किसी केंद्रीय कर्मचारी ने एक वर्ष या उससे अधिक लेकिन 5 वर्ष से कम समय तक काम किया है और इस दौरान उसकी मौत होती है तो सैलरी का छह गुना ग्रैच्युटी मिलेगी. जबकि 5 वर्ष या उससे अधिक लेकिन 20 वर्ष से कम की स्थिति में सैलरी का बारह गुना ग्रैच्युटी मिलती है. अगर कर्मचारी 20 साल या उससे अधिक समय तक कार्यरत रहता है तो उसके परिजनों को सैलरी का अधिकतम 33 गुना डेथ ग्रेच्युटी दिया जाता है. जानें 7वें वेतन आयोग के तहत ग्रेच्युटी में क्या कुछ बदला, लाखों कर्मचारियों को मिल रहा फायदा

ग्रेच्युटी भुगतान कानून, 1972 के दायरे में नहीं आने वाले कर्मचारियों के लिये कर मुक्त ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गई है. वित्त मंत्रालय ने आयकर कानून, 1961 की धारा 10 (10) (तीन) के तहत ग्रेच्युटी के लिये आयकर छूट सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी है. सरकारी तथा संगठित क्षेत्र में काम करने वाले तथा ग्रेच्युटी कानून के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिये पहले से ही ग्रेच्युटी सीमा 20 लाख रुपये है.

ग्रेच्युटी को सरल शब्दों में समझाया जाए तो, इसका मतलब कर्मचारियों की सेवा के बदले कंपनी द्वारा साभार जताने हेतु दी गई धनराशी है. ग्रैच्युटी हर कर्मचारी को रिटायर होने या आकस्मिक निधन के बाद मिलती है.