Tinder Scam: टिंडर ऐप के जरिए 52 लाख की धोखाधड़ी के आरोपी को दिल्ली कोर्ट ने नहीं दी जमानत, नौकरानी के नाम पर FIR कराने को लेकर जज पर उठाए सवाल
दिल्ली की एक सत्र अदालत ने हरियाणा की एक महिला न्यायिक अधिकारी (जज) से टिंडर ऐप के जरिए ₹52 लाख की धोखाधड़ी करने के आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने असली पीड़िता होने के बावजूद अपनी नौकरानी के नाम पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए महिला जज के रवैये की भी आलोचना की.
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नई दिल्ली, 13 जून। दिल्ली की एक सत्र अदालत ने हरियाणा की एक सेवारत महिला न्यायिक अधिकारी (जज) से टिंडर "हनीट्रैप" के जरिए 52 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने के आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर ने अपने फैसले में कहा कि बैंक लेनदेन और ऑनलाइन बातचीत के बीच सीधा संबंध है, जो स्पष्ट रूप से एक ऑनलाइन 'रोमांस फ्रॉड' (Romance Fraud) की ओर इशारा करता है. इसके साथ ही, अदालत ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई कि मुख्य पीड़िता (महिला जज) ने खुद सामने आने के बजाय अपनी घरेलू सहायिका (नौकरानी) के नाम पर यह एफआईआर दर्ज कराई. यह भी पढ़ें: S*x Racket Busted in Navi Mumbai: स्पा सेंटर की आड़ में चल रहे देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़, 4 थाई नागरिकों समेत 7 महिलाएं बचाई गईं
फर्जी पहचान और निवेश का झांसा
अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, आरोपी दीपक वत्स ने नवंबर 2025 में डेटिंग प्लेटफॉर्म टिंडर (Tinder) पर 'अभिमन्यु वशिष्ठ' नाम की फर्जी आईडी बनाई थी. उसने खुद को एक खुफिया सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर महिला जज से संपर्क किया, जो उस समय ऐप पर 'अल्ट्रुइस्टिक जॉय' नाम के छद्म प्रोफाइल का इस्तेमाल कर रही थीं. बातचीत बढ़ने पर आरोपी ने महिला को अपने जाल में फंसाया और निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा देकर उनसे 52 लाख रुपये से अधिक के कई ट्रांसफर करवा लिए.
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि यह पैसे ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के लिए स्वेच्छा से दिए गए थे. उन्होंने दावा किया कि दोनों के बीच सहमति से बने रिश्ते में खटास आने के बाद महिला जज ने अपनी नौकरानी के जरिए यह फर्जी मामला दर्ज कराया है.
एफआईआर में छिपाए असली तथ्य
जमानत सुनवाई के दौरान शुरुआती आपराधिक शिकायत का तरीका विवाद का मुख्य केंद्र रहा. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा की गई वित्तीय जांच से पता चला कि ठगे गए लगभग सभी पैसे हरियाणा की महिला न्यायिक अधिकारी के बैंक खातों से ट्रांसफर किए गए थे, जबकि एफआईआर उनकी नौकरानी दीक्षा देवी के नाम पर थी. कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि न्यायपालिका के सदस्य से पूर्ण पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है.
जज के आचरण पर कोर्ट की टिप्पणी: न्यायधीश लालर ने अपने आदेश में कहा, “एक न्यायिक अधिकारी—जिसे खुद न्याय करने और कानून के सामने सच को बनाए रखने की पवित्र जिम्मेदारी सौंपी गई है—उसने अदालत में सीधे आने के बजाय अपनी नौकरानी का सहारा लिया है. न्याय का रास्ता स्पष्टता की मांग करता है.” कोर्ट ने अधिकारी को खुद सामने आकर अपने व्हॉट्सऐप चैट और टिंडर हिस्ट्री को आधिकारिक रिकॉर्ड पर रखने को कहा.
जांच में ढिलाई और डिजिटल सबूतों की कमी
सत्र अदालत ने इस मामले में आरोपी के साथ-साथ दिल्ली पुलिस की जांच प्रक्रिया की भी आलोचना की. आरोपी दीपक वत्स पर आरोप है कि उसने पुलिस के साथ लुका-छिपी खेलते हुए केवल महिला जज द्वारा भेजे गए संदेशों को दिखाया और अपने जवाब छिपा लिए. साथ ही उसने अपने मोबाइल का पासवर्ड साझा करने से भी इनकार कर दिया.
वहीं, अदालत ने जांच अधिकारी (IO) को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टिंडर के सर्वर लॉग और पैसे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल की गई मध्यस्थ कंपनियों का वित्तीय ऑडिट समय पर न करने के लिए फटकार लगाई. कोर्ट ने संकेत दिया कि एक मौजूदा जज से जुड़े मामले में संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा मांगने में पुलिस शायद 'संस्थागत हिचकिचाहट' दिखा रही है. फिलहाल, अधूरी जांच और बड़ी रकम की बरामदगी न होने के कारण कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 13, 2026 12:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

