बाइक-बोट घोटाले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 118 एफआईआर को 1 में किया विलय
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए 3,500 करोड़ रुपये के बाइक-बोट घोटाले में उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 118 प्राथमिकी को एक प्राथमिकी में विलय कर लिया है.
नई दिल्ली, 22 मई : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए 3,500 करोड़ रुपये के बाइक-बोट घोटाले में उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 118 प्राथमिकी को एक प्राथमिकी में विलय कर लिया है. जस्टिस ए.एम. खानविलकर, अभय एस. ओका और जेबी पारदीवाला ने कहा, "हम, भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रार्थना खंड (बी) के संदर्भ में दावा की गई राहत को स्वीकार करते हैं - जिसमें सभी प्राथमिकी को एक में विलय करना शामिल है. इसमें मुख्य प्राथमिक के रूप में प्राथमिकी संख्या 353/2015 के साथ नई दिल्ली में पंजीकृत है और कानून के अनुसार कार्यवाही शामिल है, क्योंकि हमारी राय है कि कार्यवाही की बहुलता व्यापक जनहित में भी नहीं है."
शीर्ष अदालत ने टीवी पत्रकार अमीश देवगन के मामले में दिए गए अपने फैसले पर भरोसा किया और अनुच्छेद 142 के तहत अपनी व्यापक शक्ति का प्रयोग किया, जो इसे न्याय सुनिश्चित करने के लिए कोई भी आदेश पारित करने, बाइक बोट और ग्रैंड वेनिस मॉल घोटालों में कई प्राथमिकी दर्ज करने का अधिकार देता है. पीठ ने कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में 118 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं. हालांकि, 6 जुलाई, 2019 को एक प्राथमिकी आर्थिक अपराध शाखा, नई दिल्ली में दर्ज की गई है. इसमें कहा गया है, "हमें यह जोड़ना जल्दबाजी होगी कि दिल्ली की एनसीटी सरकार को इस प्राथमिकी को मुख्य प्राथमिकी के साथ जोड़ने में कोई आपत्ति नहीं है."
शीर्ष अदालत के समक्ष यह प्रस्तुत किया गया था कि कुछ प्राथमिकी में जांच पूरी हो चुकी है और यहां तक कि सभी मामलों के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा आरोपपत्र भी दायर किया गया है. एक आरोपी सतिंदर भसीन का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता विशाल गोसाईं ने अदालत के समक्ष दलील दी कि कार्यवाही की बहुलता से बचने के लिए प्राथमिकी को एक साथ जोड़ा जाना चाहिए. पीठ ने कहा, "आगे, यह जांच अधिकारी के लिए प्राथमिकी संख्या 206/2019 के रूप में दर्ज मामले में सप्लीमेंट्री आरोपपत्र दाखिल करने के लिए खुला होगा, जो अन्य मामलों में जांच के दौरान एकत्रित सभी बयानों से निपटने के लिए एक संयुक्त आरोपपत्र होगा, जिसमें संबंधित प्राथमिकी में शिकायतकर्ता के बयान को सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान के रूप में शामिल किया जाएगा." यह भी पढ़ें : दावोस सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि निवेश जुटाने, संघर्ष घटाने पर बल देंगे
बाइक बोट योजना में, एक निवेशक को मासिक रिटर्न और अन्य लाभों में 5,175 रुपये के आश्वासन के साथ प्रति बाइक 62,100 रुपये का भुगतान करना पड़ता था और किराया 4,590 रुपये प्रति बाइक प्रति माह तय किया गया था. इन मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीमों में निवेशक जितनी चाहें, उतनी बाइक्स में निवेश कर सकते थे.
(The above story first appeared on LatestLY on May 22, 2022 05:35 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

