देश की खबरें | वायु प्रदूषण के लिए हमें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है, बदनाम किया जा रहा है : पंजाब के किसान नेता

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पंजाब के किसानों ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है और बदनाम किया जा रहा है।

चंडीगढ़, सात नवंबर पंजाब के किसानों ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है और बदनाम किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के लिए उद्योग, वाहन और निर्माण क्षेत्र जिम्मेदार है, न कि पराली जलाना।

हर साल अक्टूबर और नवंबर महीने में राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के स्तर में वृद्धि के लिए पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाए जाने को एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है।

राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता में हालिया गिरावट के बीच आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक-दूसरे के शासन वाले राज्यों में पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराया।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को कहा कि पराली जलाने की सबसे ज्यादा घटनाएं भाजपा शासित हरियाणा और उत्तर प्रदेश में देखी जा रही हैं, जबकि उनके राज्य (पंजाब) में ऐसे मामलों में कमी आ रही है।

हरियाणा के कृषि मंत्री जय प्रकाश दलाल ने शनिवार को राज्य में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर भगवंत मान सरकार की आलोचना की थी।

भारती किसान यूनियन (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए किसानों को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जा रहा है और बदनाम किया जा रहा है।

उन्होंने पूछा कि यह कैसे संभव है कि पंजाब में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं केवल दिल्ली में वायु प्रदूषण का कारण बन सकता है, जालंधर, अमृतसर और राज्य के अन्य जिलों में नहीं।

उन्होंने कहा, "जहां खेतों में पराली जलाई जा रही है वहां हवा की गुणवत्ता अच्छी है और यह 300 किलोमीटर दूर दिल्ली में कैसे प्रदूषण फैला रहा है?"

उन्होंने कहा कि वाहन, उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र ही दिल्ली की हवा को प्रदूषित करते हैं। कोकरीकलां ने दावा किया, "पंजाब के किसानों को एक साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है।"

भारतीय किसान यूनियन (डकोंडा) के अध्यक्ष बूटा सिंह बुर्जगिल ने कहा कि सरकार को किसानों, खासकर छोटे किसानों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीन या अन्य समाधान उपलब्ध कराने चाहिए।

उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल पराली जलाने की घटनाओं में 40 फीसदी की कमी आई है।

अक्टूबर और नवंबर में राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के स्तर में खतरनाक वृद्धि के पीछे पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाना एक कारण माना जाता है।

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