विदेश की खबरें | ट्रंप की टिप्पणियों ने अमेरिकी सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा को खतरे में डाला : नाटो प्रमुख
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के सबसे प्रबल दावेदार ट्रंप ने कहा कि रूस उन नाटो सदस्यों के साथ ‘‘जो करना चाहे, करें’’, जो रक्षा पर खर्च के अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाते हैं।

नाटो महासचिव स्टोल्टनबर्ग ने एक बयान में कहा, ‘‘ऐसा कोई भी संकेत कि सहयोगी देश एक-दूसरे की रक्षा नहीं करेंगे, अमेरिका समेत हमारी सुरक्षा को कमजोर करता है और अमेरिकी तथा यूरोपीय सैनिकों के लिए खतरा बढ़ाता है।’’

साउथ कैरोलाइना के कॉनवे में शनिवार को एक रैली में ट्रंप ने बताया था कि राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने एक नाटो सदस्य से कहा था कि वह नाटो सहयोगियों के ‘‘कसूरवार’’ होने पर रूस को उनके साथ अपने मनमाफिक व्यवहार करने के लिए ‘‘प्रेरित’’ करेंगे।

ट्रंप की टिप्पणियों से पोलैंड और बाल्टिक देश लिथुआनिया, लात्विया और एस्टोनिया जैसे नाटो के अग्रिम पंक्ति के देशों में चिंता पैदा हो गयी है जो शीत युद्ध के दौरान या तो पूरी तरह मॉस्को के नियंत्रण में थे या सोवियत संघ के नियंत्रण में थे। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को देखते हुए उनकी चिंता बढ़ गयी है।

नाटो सहयोगियों ने 2014 में 2024 तक रक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का दो फीसदी खर्च करने का संकल्प लिया था। नाटो के आकलन के मुताबिक, 2023 की शुरुआत तक उसके 30 में से 10 सदस्य दो फीसदी तक या उससे अधिक खर्च करने के करीब थे जबकि 13 देश 1.5 प्रतिशत या उससे कम खर्च कर रहे थे।

स्टोल्टनबर्ग ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि ‘‘चाहे जो भी राष्ट्रपति पद का चुनाव जीते, लेकिन अमेरिका नाटो का एक मजबूत और प्रतिबद्ध सहयोगी रहेगा।’’

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