देश की खबरें | मैदान से हिमालय की पर्वतमालाएं दिखने के नये और पुराने दावों को भौतिकी के प्रोफेसर ने दी चुनौती

पुणे, 10 जून पिछले साल लॉकडाउन के दौरान उत्तर भारत के कुछ शहरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर हिमालय की चोटियां दिखने के सोशल मीडिया पर किये गये दावों को भौतिकी के एक प्रोफेसर और उनके 17 वर्षीय छात्र ने चुनौती दी है।

पिछले वर्ष मार्च में कोरोना वायरस महामारी की वजह से लॉकडाउन लगने के बाद आर्थिक और परिवहन गतिविधियां रुक गयी थीं और प्रदूषण कम होने के बीच सोशल मीडिया पर कई ऐसी तस्वीरें डाली गयीं जिनमें मैदान के शहरों से पर्वतमालाओं के सुंदर दृश्य दिखने का दावा किया गया।

गुरु-शिष्य की इस जोड़ी ने इन दावों को ही नहीं बल्कि एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल के संस्थापक सर विलियम जॉन्स द्वारा ऐसे दृश्य देखने के दो सदी से अधिक समय पुराने दावों को भी चुनौती दी है।

विजय सिंह (71) और अर्णव सिंह (17) ने अपनी रिपोर्ट ‘मैदानों से हिमालय देखने पर’ (ऑन व्यूइंग द हिमालयाज फ्रॉम द प्लेन्स) में कहा है कि सर जॉन्स का दावा गलत हो सकता है। यह रिपोर्ट ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ फिजिक्स’ में प्रकाशित हुई है।

जॉन्स ने 1785 में बिहार के भागलपुर से 366 किलोमीटर दूर पूर्वी हिमालय के माउंट जोमोल्हारी को देखने का दावा किया था। पांच साल बाद उनके उत्तराधिकारी हेनरी कोलब्रुक ने भागलपुर से 80 किलोमीटर दूर पूर्णिया से हिमालय की चोटी देखने का दावा किया था।

आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर रहे विजय सिंह के अनुसार भागलपुर से माउंट जोमोल्हारी को देख पाना असंभव है जिसे ‘कंचनजंघा की दुल्हन’ भी कहा जाता है।

सिंह ने बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई ’ से कहा कि जब पिछले साल पंजाब के जालंधर से और बिहार के पूर्णिया से हिमालय की चोटियां दिखने की खबरें आईं तो उन्हें जॉन्स और कोलब्रूक के दावे याद आए और उन्होंने छात्र अर्णव के साथ इन दावों का अध्ययन करने का फैसला किया।

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