देश की खबरें | लॉकडाउन का असर : शादियों में बैंड , बाजा , बारात की जगह मास्क, सेनिटाइजर्स और सादगी
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नयी दिल्ली, 31 मई मेहंदी से लेकर संगीत तक कई रंग बिरंगे समारोह , दोस्तों और रिश्तेदारों के मजमे के बीच सात फेरे लेने का सपना कोरोना वायरस महामारी के चलते फिलहाल पूरा नहीं होता देख कई जोड़ों ने या तो शादी टाल दी है या बेहद सादे समारोह में परिणय सूत्र में बंधने का फैसला किया ।

कोरोना काल की इन शादियों में बैंड , बाजा , बारात की जगह मास्क, सेनिटाइजर्स और सामाजिक दूरी के नियमों ने ले ली है ।

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कई जोड़ों का इरादा किसी बॉलीवुड सिनेमा की तरह भव्य शादी का था जिनमें सैकड़ों और कभी-कभी दो हजार तक अतिथियों की सूची पहुंच जाती है । कई समारोहों और डिजाइनर कपड़ों पर लाखों रुपये खर्च कर दिये जाते हैं। लेकिन महामारी के कारण अब कई शादियां बिल्कुल सादे स्तर पर हो रही है ।

सात जनम तक एक दूसरे का साथ निभाने की कसमें अब आलीशान बैंक्वेट हॉल या मैरिज गार्डन में नहीं बल्कि घर की छतों, घरों, मंदिर , चर्च या कहीं कहीं तो राज्य की सीमाओं पर खाई जा रही हैं । इस पवित्र रस्म के साक्षी सिर्फ घर के लोग ही बन पा रहे हैं ।

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ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में एक दुल्हन ने कहा, ‘‘हमारे पास एक भव्य जुलूस, सजावट, पटाखे, दावत और रिश्तेदार नहीं थे, लेकिन यह वास्तव में हमारे जीवन का सबसे यादगार अनुभव था।’’

जिले में इरसामा ब्लॉक निवासी एक दूल्हे ज्योति रंजन स्वैन ने कहा, ‘‘हमने पहले एक भव्य समारोह की व्यवस्था की थी। लेकिन लॉकडाउन ने कामों में रूकावट पैदा की। इसलिए हमने शादी के लिए बचाए गए धन का एक हिस्सा दान करने का फैसला किया ताकि राज्य को महामारी से निपटने में मदद मिल सके।’’

माता-पिता के अलावा इरसामा पुलिस थाने के एक निरीक्षक और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) शादी में शामिल हुए।

बीडीओ कार्तिक चंद्र बेहरा ने कहा, ‘‘ शादी में ज्यादा लोग नहीं थे। दंपत्ति ने समारोह के बाद मिठाइयां बांटी। यह एक सादा समारोह था।’’

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के ओम प्रकाश शा के पिछले सप्ताह असम के धुबरी में काजोल से शादी करने की।

एक राज्य से दूसरे राज्य में आवाजाही पर प्रतिबंध और अनिवार्य रूप से पृथक-वास में रहने के मद्देनजर दोनों के परिवारों ने अनुमति के लिए दोनों जिलों के प्रशासन से संपर्क किया था।

विचार विमर्श के बाद अधिकारियों ने धुबरी-जलपाईगुड़ी ‘सीमा’ पर शादी कराने का फैसला किया।

तौफीक हुसैन और अबेदा बेगम ने भी लॉकडाउन के बावजूद अपनी शादी को आगे बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने पिछले महीने असम के गोलपाडा में घर में शादी की, जिसमें केवल आठ परिवार के सदस्य मौजूद थे।

हुसैन ने कहा, ‘‘यह वह तरीका है जिसके तहत ही विवाह हमेशा किया जाना चाहिए ... ज्यादा भीड़ एकत्र करने और पैसा खर्च करने के बजाय करीबी रिश्तेदारों के बीच शादी करना ज्यादा मायने रखता है।’’

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में के शक्तिवेल ने पिछले महीने अपने घर की छत पर शादी की।

एसी मैकेनिक शक्तिवेल ने कहा, ‘‘ऐसा करने से कुछ लाख रुपये के नियोजित व्यय में कम से कम 75 प्रतिशत की बचत हुई।’’

शादी में परिवार के केवल 10 सदस्य शामिल हुए लेकिन शक्तिवेल संतुष्ट थे।

पड़ोसी केरल में रेबिन विंसेंट ग्रेलान और सीला लोना ने भी सादगी के साथ शादी की। उन्होंने 15 अप्रैल को पावारटी में सेंट जोसेफ में शादी की और इस मौके पर परिवार के केवल 10 सदस्य मौजूद थे।

ग्रेलान ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘शादी की तारीख पहले ही तय हो गई थी ... हम दोनों ने सभी को उसी तारीख पर शादी करने के लिए मना लिया और एक सादे समारोह में शादी हुई।’’

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