जरुरी जानकारी | असम में कृषि क्षेत्र की समस्याओं को संबोधित करने के लिए किसान आयोग बनाने का सुझाव

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. लॉकडाउन के दौरान अर्थव्यवस्था को गति देने के उपाय सुझाने के लिए बनाई, असम आर्थिक सलाहकार समिति ने सोमवार को राज्य सरकार से सिफारिश की कि वह कृषि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए किसान आयोग बनाये।

गुवाहाटी, एक जून लॉकडाउन के दौरान अर्थव्यवस्था को गति देने के उपाय सुझाने के लिए बनाई, असम आर्थिक सलाहकार समिति ने सोमवार को राज्य सरकार से सिफारिश की कि वह कृषि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए किसान आयोग बनाये।

         असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने समिति के सुझावों को लागू करने के लिए वित्त मंत्री हिमंत बिस्व सरमाकी अगुवाई में तीन सदस्यीय मंत्रिस्तरीय समिति बनाने की घोषणा की।इसमें उद्योग मंत्री चंद्र मोहन पटवारी और कृषि मंत्री अतुल बोरा भी रखे गए हैं।

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        समिति के अध्यक्ष सुभाष दास ने कहा कि रिपोर्ट में राज्य की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर की जरूरतों पर ध्यान दिया गया है।

         दासस ने कहा, ‘‘खेतिहरों की समस्याओं का समाधान करने के लिए असम में कोई किसान आयोग नहीं है। हमारा प्रमुख सुझाव है कि कम से कम 2-3 वर्षों के लिए किसान आयोग का गठन किया जाए। इससे किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आयोग के सामने जाने का अवसर मिलेगा।’’

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      उन्होंने यह भी बताया कि राज्य की कृषि नीति तैयार है लेकिन अभी तक अधिसूचित नहीं की गई है और सरकार से अनुरोध किया है कि वह कृषक समुदाय की मदद के लिए इसे जल्द ही अधिसूचित करे।

      औद्योगिक क्षेत्र के बारे में, समिति ने कहा कि कारखानों की कार्यशील पूंजी प्रभावित हुई है क्योंकि लॉकडाऊन के दौरान पिछले दो महीनों में कोई उत्पादन नहीं हुआ और कार्यशील पूंजी के ऋण के लिए 2-3 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी देने का सुझाव दिया।

      दास ने सोनोवाल को बताया, ‘‘हमने (उद्योग) विभाग से कुछ आंकड़े भी लिए हैं और यह दर्शाता है कि 743 करोड़ रुपये की केंद्रीय सब्सिडी और 21 करोड़ रुपये की राज्य सब्सिडी लंबित है। यदि हम एक महीने के भीतर इस राशि को जारी कर सकते हैं, तो हमारे उद्योगों को भारी लाभ मिलेगा। यह उनकी कार्यशील पूंजी बनेगा।’’

     समिति ने सरकार को सदस्यों से योगदान के साथ कानून के माध्यम से एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा योजना बनाने का सुझाव भी दिया।

      दास ने कहा, ‘‘अगर असंगठित क्षेत्र की किसी इकाई या किसी भी उद्योग में लोगों की नौकरी जाती है तो उन्हें छह महीने के लिए समर्थन दिया जाना चाहिए। यह इससे अधिक नहीं होना चाहिए। लोग इस योजना के लिए मासिक 100 रुपये या 200 रुपये का योगदान कर सकते हैं और इसे बाद में तय किया जा सकता है। यह अमेरिका की तरह है जहां बेहद पेशेवर लोगाों को नौकरी छूटने के बाद छह महीने तक समर्थन दिया जाता है।“

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