विदेश की खबरें | डिस्लेक्सिया पीड़ित छात्रों को कार्यस्थल में चुनौतियां मिलती है, सहयोग से वे आगे बढ़ सकते हैं
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मॉन्ट्रियल, 15 मई (द कन्वरसेशन) विश्वविद्यालय के छात्र जीवन से पेशेवर जिंदगी में कदम रखना किसी के लिए भी एक अहम परिवर्तन हो सकता है लेकिन डिस्लेक्सिया प्रभावित छात्रों के लिए यह विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

पढ़ाई के दौरान अक्सर डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोगों के लिए अनुकूल माहौल की गुंजाइश रहती है, पर पेशेवर वातावरण में अक्सर ऐसी स्थितियां नहीं बन पाती हैं।

संयोग से ऐसी रणनीतिक पहल हैं जिन्हें कार्यस्थलों में स्थापित किया जा सकता है ताकि डिस्लेक्सिया से प्रभावित व्यक्तियों को न केवल अनुकूलन करने में मदद मिल सके, बल्कि उनके करियर में उत्कृष्टता प्राप्त हो सके।

एक अनुमान है कि 20 प्रतिशत आबादी को डिस्लेक्सिया है और सीखने की अक्षमता वाले 80 प्रतिशत लोगों को डिस्लेक्सिया है, जो इस संदर्भ में इसे सबसे आम दिव्यांगता बनाता है।

डिस्लेक्सिया किसी व्यक्ति की पढ़ने और वर्तनी की क्षमताओं को प्रभावित करता है, लेकिन उनकी समग्र बुद्धि को प्रभावित नहीं करता है।

डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोगों में अद्वितीय शक्तियां होती हैं जो कार्यस्थल में मूल्यवान हो सकती हैं। कार्यस्थलों में विविधता और समावेशन को अधिक महत्व दिए जाने के साथ, डिस्लेक्सिया से प्रभावित कर्मचारियों को समझना और उनका समर्थन करना न केवल कर्मचारियों की व्यक्तिगत सफलता के लिए, बल्कि बड़े पैमाने पर कार्यस्थलों की संगठनात्मक प्रभावशीलता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

विश्वविद्यालय से पेशेवर जीवन का सफर

विश्वविद्यालय अक्सर परीक्षाओं में अतिरिक्त समय, विशेष ट्यूशन और सामग्री के वैकल्पिक प्रारूप (उदाहरण के लिए, रिकॉर्डिंग, वैकल्पिक पाठ प्रारूप और उपशीर्षक वाले वीडियो) जैसे संसाधन प्रदान करते हैं। दुर्भाग्य से, ये अनुकूलन और सहायता कार्यस्थल पर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। अनुकूलन और सहायता में यह परिवर्तन तनावपूर्ण हो सकता है और डिस्लेक्सिया से प्रभावित नए कर्मचारियों के प्रदर्शन पर प्रभाव डाल सकता है।

नियोक्ताओं को डिस्लेक्सिया से प्रभावित कर्मचारियों के सामने आने वाली चुनौतियों को पहचानना चाहिए और कार्यस्थल में सफलता के समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए समायोजन लागू करना चाहिए।

कार्यस्थल पर ऐसे समर्थन की कमी न केवल उनके पेशेवर प्रदर्शन और करियर की प्रगति को प्रभावित कर सकती है, बल्कि उनके समग्र कल्याण और आत्म-सम्मान को भी प्रभावित कर सकती है।

सफलता की राह बनाना

समावेशी कार्यस्थल प्रथाएं महत्वपूर्ण अंतर ला सकती हैं। एक सहायक और अनुकूल कार्य वातावरण बनाने से डिस्लेक्सिया से प्रभावित व्यक्तियों को कार्यस्थल में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। कुछ कदमों से कार्यस्थल पर उन्हें और मदद मिल सकती है।

1. संरचित और स्पष्ट संचार: सुनिश्चित करें कि कार्यस्थल संचार में लिखित और मौखिक दोनों रूपों में स्पष्ट, संक्षिप्त का उपयोग हो। इससे स्पष्टता सुनिश्चित होती है और गलतफहमियां कम होती हैं।

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