जरुरी जानकारी | आर्थिक संकट में घिरे श्रीलंका ने पहली बार कर्ज भुगतान में चूक की

कोलंबो, 20 मई श्रीलंका ने अपने इतिहास में पहली बार कर्ज के भुगतान में चूक की है। कोविड-19 महामारी और यूक्रेन में युद्ध के चलते वैश्विक हालात बिगड़ने के बीच श्रीलंका भीषण वित्तीय संकट से जूझ रहा है।

श्रीलंकाई केंद्रीय बैंक के गवर्नर पी नंदलाल वीरसिंघे ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश अपने दो सॉवरेन बांड पर ब्याज भुगतान के लिए 30 दिनों की छूट अवधि खत्म होने के बाद कर्ज पर ‘एहतियाती चूक’ की स्थिति में पहुंच गया।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज के अनुसार इस सदी में पहली बार एशिया-प्रशांत क्षेत्र के किसी देश ने कर्ज भुगतान में चूक की है। श्रीलंका 30 दिन की रियायत अवधि के बाद भी अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बांड का भुगतान करने में विफल रहा है।

बांड का भुगतान 18 अप्रैल तक करना था और इनकी राशि 7.8 करोड़ डॉलर है। इसके भुगतान के लिए 30 दिन की रियायत अवधि भी बुधवार को समाप्त हो गई।

बीबीसी ने बताया कि बृहस्पतिवार को दुनिया की दो सबसे बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भी कहा कि श्रीलंका ने कर्ज भुगतान में चूक की है।

चूक की स्थिति तब बनती है जब सरकारें कर्ज देने वालों को बकाया लौटाने में पूरी तरह असमर्थ हो जाती हैं। यह निवेशकों के साथ किसी देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है, और उस देश के लिए आगे उधार पाना कठिन हो जाता है।

वीरसिंघे से बृहस्पतिवार को जब पूछा गया कि क्या देश डिफॉल्ट की स्थिति में है तो उन्होंने कहा, ‘‘हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है। हमने कहा है कि जब तक वे हमारे कर्ज का पुनर्गठन नहीं करते, हम भुगतान नहीं कर पाएंगे। इसे ही आप एहतियाती चूक (प्री-इम्पटिव डिफॉल्ट) कहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘तकनीकी परिएं हो सकती हैं... उनकी तरफ से वे इसे एक चूक मान सकते हैं। हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है जब तक ऋण का पुनर्गठन नहीं होता है, हम चुका नहीं सकते हैं।’’

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